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लॉकडाउन का असर : राजस्थान के अनेक शहरों में हवा की गुणवत्ता में ‘आश्चर्यजनक’ सुधार

lockdown effect: राजस्थान में पिछले लगभग एक महीने से जारी लॉकडाउन से भले ही आम जनता को दिक्कत हुई हो, लेकिन इससे ज्यादातर शहरों में हवा की गुणवत्ता में ‘आश्चर्यजनक’ सुधार देखने को मिला है. कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के खतरे से निबटने के लिए राजस्थान में 22 मार्च से लॉकडाउन है.

जयपुर : राजस्थान में पिछले लगभग एक महीने से जारी लॉकडाउन से भले ही आम जनता को दिक्कत हुई हो, लेकिन इससे ज्यादातर शहरों में हवा की गुणवत्ता में ‘आश्चर्यजनक’ सुधार देखने को मिला है. कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के खतरे से निबटने के लिए राजस्थान में 22 मार्च से लॉकडाउन है.

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अधिकारियों के अनुसार, इस राज्य के कई कस्बों और शहरों में वायु की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है. उनका कहना है कि लॉकडाउन के चलते यात्रा पर लगाये गये कड़े प्रतिबंध और वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों सहित गैर-आवश्यक गतिविधियों को बंद करने से यह सुधार हुआ है.

राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष पवन कुमार गोयल ने लॉकडाउन के दौरान आंकड़ों के अध्ययन से निकले प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी देते हुए बताया कि लॉकडाउन से राज्य में परिवेशी वायु गुणवत्ता में सुधार आया है. सभी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अब संतोषजनक हो गया है, जो पहले खराब से संतोषजनक तक था.

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उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों पर एक्यूआई में 21 (शास्त्री नगर, जयपुर) से 68 (भिवाड़ी-रीको औद्योगिक क्षेत्र-III) फीसदी के बीच कमी आयी है. उन्होंने बताया कि इस दौरान भिवाड़ी के एक्यूआई में अधिकतम सुधार देखा गया है. भिवाड़ी में पीएम10, पीएम2.5 और नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे प्रमुख प्रदूषकों के संदर्भ में भी लगभग 70 प्रतिशत कमी देखी गयी है.

इसी तरह अन्य शहरों में जहां वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत वाहनों से होने वाला प्रदूषण और सड़क की धूल का री-सस्पेंशन होने के कारण प्रमुख प्रदूषकों में 27 से 73 फीसदी तक की महत्वपूर्ण कमी देखी गयी है. पीएम2.5 की कमी लॉकडाउन के बाद के दिनों में अधिक स्पष्ट है, जो लॉकडाउन के प्रभावी प्रवर्तन एवं ज्यादातर स्थानों पर परिवेश के तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप प्रदूषकों के बेहतर फैलाव के कारण हो सकता है.

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श्री गोयल ने बताया कि वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों में परिवहन, उद्योग, बिजली संयंत्र, निर्माण गतिविधियां, जैव ईंधन का जलना, डस्टरी-सस्पेंशन और अन्य आवासीय गतिविधियां सम्मिलित हैं. मंडल जयपुर में अपनी तीन और अलवर, अजमेर, भिवाड़ी, जोधपुर, कोटा, पाली और उदयपुर में स्थित एक-एक सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) के नेटवर्क के माध्यम से वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है.

अध्ययन के लिए 15 से 21 मार्च की लॉकडाउन से पहले की अवधि और 22 मार्च से 7 अप्रैल की लॉकडाउन अवधि के डेटा का उपयोग किया गया है.

Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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