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अयोध्या मामला: फैसले से पहले अलर्ट में योगी सरकार, 30 नवंबर तक सरकारी अफसरों की छुट्टियां रद्द

लखनऊ/ नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वह अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद संबंधी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में प्रतिदिन हो रही सुनवाई को बुधवार शाम को पूरी कर देगा. साथ ही कोर्ट ने कहा-अब बहुत हो चुका. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों […]

लखनऊ/ नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वह अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद संबंधी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में प्रतिदिन हो रही सुनवाई को बुधवार शाम को पूरी कर देगा. साथ ही कोर्ट ने कहा-अब बहुत हो चुका. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि वह पिछले 39 दिनों से अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुनवाई कर रही है और मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा. इधर, उत्तर प्रदेश में भी फैसले को लेकर हलचल तेज हो की है. सूबे की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां 30 नवंबर तक रद्द कर दी हैं. वहीं, अफसरों को अपने-अपने मुख्यालय में बने रहने का निर्देश दिया गया है.

सुनवाई आज शाम पांच बजे हो जाएगी पूरी
अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. पीठ ने मामले की, 40वें दिन सुनवाई शुरू होने पर कहा कि इस मामले की सुनवाई आज शाम पांच बजे पूरी हो जाएगी. अब बहुत हो चुका. कोर्ट ने पहले कहा था कि सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी. अब इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया है. आपको बता दें कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है.

एक पक्षकार की याचिका खारिज
पीठ ने आज सुनवाई में हस्तक्षेप की एक पक्षकार की याचिका को भी खारिज कर दिया और कहा कि सुनवाई के इस चरण पर अब किसी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी. हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा दायर मुकदमे के जवाब में अपना अभ्यावेदन आरंभ किया. उल्लेखनीय है कि संविधान पीठ अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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