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UP Madarsa: यूपी में 108 मदरसों को 150 करोड़ की विदेशी फंडिंग का खुलासा, अब जांच रोकने की मांग, जानें मामला

यूपी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश के 108 मदरसों को विदेशी फंडिंग मिल रही है. एसआईटी ने इन मदरसों से बैंक खातों का पूरी जानकारी मांगी है. जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 25 हजार में से 16500 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं.

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे के बाद कई सवाल उठ रहे हैं. जांच पड़ताल के बाद मदरसे संदेह के घेरे में हैं. प्रदेश के 108 मदरसों को महज दो साल में 150 करोड़ से अधिक का फंड मिलने के बाद अधिकारी हरकत में आ गए हैं. बताया जा रहा है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को जांच में बड़े पैमाने पर मदरसों में विदेशी फंडिंग के सुबूत मिले हैं. जांच पड़ताल में सामने आया है कि मदरसों को खाड़ी देशों से फंडिग होती रही है. ऐसे में जांच टीम इसकी गहराई से छानबीन में जुट गई है. जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के जिन जनपदों के मदरसे को विदेशों से आर्थिक मदद मिलती रही है, उनमें श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थ नगर, मुरादाबाद, रामपुर, अलीगढ़ सहारनपुर, देवबंद और आजमगढ़ ​सहित कई जिले शामिल हैं. बताया जा रहा है कि यूपी एटीएस ने विदेशों से फंड भेजने वाली संस्था कौन है, रकम कहां से भेजी गई है, किस तरीके से भेजी गई, किस अकाउंट से भेजी गई, इसका पूरी जानकारी इन मदरसों के प्रबंधकों से तलब की है. इतना नहीं नहीं फंडिंग मिलने के बाद रकम मदरसे में कहां खर्च हुई. रकम से क्या किया गया है, इसक खर्च की सभी रसीद, खरीदारी का बिल आदि सभी जांच पड़ताल के दायरे में होगा. इससे एटीएस पूरी तरह से समझ सकेगी कि आखिरकार इतने बड़े पैमाने पर फंडिंग के पीछे का क्या मकसद है. उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर के महीने में एडीजी एटीएस और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसरों की तीन सदस्य एसआईटी गठित कर मदरसों की विदेशी फंडिंग के जांच के आदेश दिए थे.

तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच

यूपी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश के 108 मदरसों को विदेशी फंडिंग मिल रही है. एसआईटी ने इन मदरसों से बैंक खातों का पूरी जानकारी मांगी है. जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 25 हजार में से 16500 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं. इनमें से कई मदरसों को विदेश से फंडिंग की जा रही थी. योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसकी जांच के लिए एडीजी एटीएस मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था.

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यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन ने जांच पर जताई आपत्ति

इस बीच गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच कराने के बाद अनुदानित व स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों की भी जांच कराने के लिए प्रत्येक जिले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व डीएम द्वारा नामित खंड शिक्षा अधिकारी की समिति बना दी गई है. मदरसों की जांच अभी कराए जाने पर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि कहा कि मदरसों में अभी कंपार्टमेंट का परीक्षाफल घोषित किया जाना है. बोर्ड के फार्म भरे जा रहे हैं. मदरसों में जांच होने से महत्वपूर्ण कार्य तथा पठन-पाठन प्रभावित हो जाएगा. मदरसा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में भी विलंब हो जाएगा. इसलिए जांच प्रकिया स्थगित कराते हुए परीक्षा कार्य को सर्वोत्तम वरीयता दिलाई जाए, ताकि छात्र-छात्राओं का भविष्य सुरक्षित किया जा सके. उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह से मिलकर उन्हें पत्र सौंपा और जांच बोर्ड परीक्षा के बाद कराने का अनुरोध किया है.

जनपदों में जांच समिति के हवाले

मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार प्रियंका अवस्थी ने निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को पत्र भेजकर जांच कराने का अनुरोध किया था. इसी के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निदेशक जे. रीभा ने सभी मंडलीय उप निदेशक और सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं. जिन जिलों में 20 से अधिक मदरसे हैं वहां दूसरी समिति बना दी है. इसमें उपनिदेशक अल्पसंख्यक कल्याण व डीएम द्वारा नामित खंड शिक्षा अधिकारी रहेंगे. निदेशक ने मदरसों के भवनों, आधारभूत सुविधाओं एवं कार्यरत शिक्षक तथा कर्मचारियों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराने के निर्देश दिए थे.


30 दिसंबर तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

यह जांच 30 दिसंबर तक पूरी कर रिपोर्ट मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार को देना होगा. प्रदेश में 560 मदरसों को सरकार से अनुदान मिलता है. इसकी जांच पहले चरण में 30 दिसंबर तक पूरी करनी है. दूसरे चरण में 3,834 स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच 15 जनवरी से 30 मार्च के बीच होनी है. निदेशक ने पत्र में यह भी लिखा कि प्रदेश में स्थित मदरसों में अब भी आधारभूत सुविधाओं का अभाव है और वहां पढ़ रहे बच्चों को गुणवत्तापरक वैज्ञानिक एवं आधुनिक शिक्षा प्राप्त नहीं हो पा रही है, जिसके कारण छात्रों को रोजगार के समुचित अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं.

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