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प्लेसमेंट को लेकर निजी आइटीआइ पर शिकंजा कसेगी सरकार

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कोलकाता : राज्य सरकार प्लेसमेंट व मूलभूत सुविधाओं के विकास को लेकर निजी आइटीआइ संस्थानों पर दबाव बनायेगी. राज्य के तकनीकी शिक्षा मामलों के मंत्री पुर्णेंदु बसु ने गुरुवार को विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान बताया कि राज्य में कुल 235 आइटीआइ हैं. इनमें से 112 आइटीअाई निजी संस्थानों द्वारा संचालित हैं. सरकारी आइटीआइ […]

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कोलकाता : राज्य सरकार प्लेसमेंट व मूलभूत सुविधाओं के विकास को लेकर निजी आइटीआइ संस्थानों पर दबाव बनायेगी. राज्य के तकनीकी शिक्षा मामलों के मंत्री पुर्णेंदु बसु ने गुरुवार को विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान बताया कि राज्य में कुल 235 आइटीआइ हैं. इनमें से 112 आइटीअाई निजी संस्थानों द्वारा संचालित हैं. सरकारी आइटीआइ में 45,530 छात्र तथा निजी आइटीआइ में 21,180 छात्र पढ़ रहे हैं.

सरकारी आइटीआइ में पढ़ रहे छात्रों का प्लेसमेंट लगभग हो ही जाता है. राज्य सरकार के अतिरिक्त केंद्रीय संस्थानों रेलवे व पोर्ट आदि में भी इनकी नियुक्ति होती है, लेकिन निजी आइटीआइ के छात्रों के प्लेसमेंट को लेकर समस्या आ रही है. कई की मूलभूत सुविधाएं भी संतोषजनक नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने इन आइटीआइ से कहा कि कम से कम 70 फीसदी प्लेसमेंट की व्यवस्था करनी होगी.
इस बाबत सरकार कैंपस इंटरव्यू, विभिन्न चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ आपसी सहयोग आदि को लेकर बातचीत कर रही है.
आइटीआइ में शुरू होंगे स्मार्ट क्लास
श्री बसु ने कहा कि राज्य सरकार ने आइटीआइ में स्मार्ट क्लास शुरू करने की योजना बनायी है. इसके तहत दो क्लास रूम को एक क्लास रूम में परिवर्तित किया जा रहा है. इसमें अाधुनिक स्तर के उपकरण व सुविधाएं रहेंगी. क्लास रूम में वाइफाइ व लैंडलाइन कनेक्शन की भी व्यवस्था रहेगी. फिलहाल कुछ आइटीआइ में यह शुरू की गयी है. धीरे-धीरे स्मार्ट क्लास अन्य आइटीआइ में भी शुरू की जायेगी.
कैदियों को आइटीआइ की ट्रेनिंग
श्री बसु ने कहा कि दमदम केंद्रीय संशोधनागार में 47 कैदियों को आइटीआइ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मार्च में इन्हें प्रमाणपत्र दिया जायेगा. इसके साथ ही नये बैच की भी शुरुआत होगी. उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण एक गैरसरकारी संस्था की मदद से दी जा रही है तथा इसमें बेलुर मठ आइटीआइ का बहुत योगदान है. उन्होंने कहा कि कैदियों को घरेलू इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जब वे जेल से बाहर आयें, तो रोजी-रोटी के लिए उन्हें किसी पर आश्रित नहीं रहना पड़े तथा स्वत: अपनी आजीविका कमा सकें.

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