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ऑटिज्म बन रहा जटिल बीमारी

आसनसोल : काजी नजरूल विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के ऑडिटोरियम हॉल में मनोविज्ञान विभाग के ‘मनोविज्ञान और विश्व मानसिक विकार जागरूकता माह’ का उदघाटन कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती ने किया. प्रशासनिक भवन के निचले तल्ले स्थित काजी नजरूल इस्लाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. डॉ शांतनू कुमार घोष, बांग्ला विभाग की प्रधान मोनालिसा दास, […]

आसनसोल : काजी नजरूल विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के ऑडिटोरियम हॉल में मनोविज्ञान विभाग के ‘मनोविज्ञान और विश्व मानसिक विकार जागरूकता माह’ का उदघाटन कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती ने किया. प्रशासनिक भवन के निचले तल्ले स्थित काजी नजरूल इस्लाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. डॉ शांतनू कुमार घोष, बांग्ला विभाग की प्रधान मोनालिसा दास, डॉ परिमलेंदू बनर्जी, मनोविज्ञान विभाग के कोऑर्डिनेटर प्रो. शुभब्रत पोद्दार, सहायक प्रोफेसर डॉ रोशन लाल, टी घोष, दिव्यांगना विश्वास, डॉ राहुल मजूमदार आदि उपस्थित थे.

कुलपति डॉ चक्रवर्ती ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ते मानसिक रोगियों के आंकडों पर चिंता जाहिर करते हुए मनुष्य के जीवन में मनोविज्ञान के प्रभाव और महत्व को बताया. ऑटिज्म अर्थात मानसिक विकार को एक जटिल बिमारी बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मनोरोग से पीड़ित अधिकांश व्यक्तियों को यह पता ही नहीं होता कि वे मानिसक रूप से बीमार हैं. उनके व्यवहार, बोलचाल और लक्षणों से विभागीय विशेषज्ञ ही उनकी पहचान कर सकते हैं.

मनोविज्ञान के विषय पर देश और दुनिया भर के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थाओं में चल रहे गहन शोध के विषयों को महत्वपूर्ण बताते हुए मनोविज्ञान के विषयों पर लोगों के बीच जागरूकता और चर्चा को अनिवार्य एवं सामाजिक दायित्व बताया. उन्होंने कहा कि केएनयू में पठन पाठन के लिए विषयों के चयन के दौरान मनौविज्ञान विषय के महत्व को समझते हुए ही उन्होंने विश्वविद्यालय में इस विषय के अध्ययन के लिए उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजकर इसकी मंजूरी ली थी.

उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग ही मनोविज्ञान विषय को एक पाठयक्रम के रूप में देखते और जानते हैं. जानकार लोगों की बढ़ती मांग के अनुरूप देश और दुनिया में मनोविज्ञानियों की भारी कमी का ब्यौरा देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ही ऐसे संस्थान हैं जहां मनोवैज्ञानिक तैयार किये जाते हैं.

उन्होंने कोलकाता के मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति तीन वर्षों से अपनी मृत मां को फ्रिज में बंद कर रखे हुए था. इसकी जानकारी होते ही उसके प्रति लोगों के क्रोध, आक्रोश और घृणा भर गया. परंतु चिकित्सकों ने जांच के दौरान उसे मनोरोग से पीड़ित पाया. विषय को ज्ञान का भंडार बताते हुए कहा कि योग्यता, प्रतिभा, जिम्मेवारियों की परख और व्यक्तित्व को जानने का मौका देता है. हर व्यक्ति की अपनी विशेष योग्यता और गुण होता है जिसकी जानकारी उसे होनी चाहिए.

Prabhat Khabar Digital Desk
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