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शहादत को संकीर्ण करने के खिलाफ युवा वर्ग में भारी आक्रोश

आसनसोल : शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के साथ खांड़ा जोड़ कर उनकी प्रतिमा को धार्मिक रंग दिये जाने का विभिन्न युवा संगठनों के नेताओं ने विरोध किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा कर उनकी शहादत को छोटा करने की कोशिश की गई है. यदि प्रतिमा पुरान रूप में न आई तो सढ़कों पर इसका […]

आसनसोल : शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के साथ खांड़ा जोड़ कर उनकी प्रतिमा को धार्मिक रंग दिये जाने का विभिन्न युवा संगठनों के नेताओं ने विरोध किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा कर उनकी शहादत को छोटा करने की कोशिश की गई है. यदि प्रतिमा पुरान रूप में न आई तो सढ़कों पर इसका प्रतिवाद किया जायेगा.
सीपीआइ के युवा संगठन ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (एआइवाईएफ) के पश्चिम बर्दवान जिला सचिव राजू राम ने कहा कि भगत सिंह राष्ट्रीय आईकॉन हैं. उनके सिद्धांत एवं विचार युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोंत हैं. उन्होंने हंसते हंसते आजादी के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया. भगत सिंह को किसी धर्म विशेष से जोड़ने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा करना महान व्यक्ति को छोटा करना होगा.
जिसका वे कड़ा प्रतिवाद करते हैं. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने इस मामले में जरूरी हस्तक्षेप नहीं किया तो आंदोलन होगा तथा युवा सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे. संगठन के जिला सांगठनिक सचिव अनिल पासवान ने कहा कि भगत सिंह की लडाई किसी धर्म, जाति या समुदाय विशेष के लिए नहीं थी.
बल्कि उनकी लडाई देश की आजादी के लिए थी. वे किसी धर्म के नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रति समर्पित थे. उन्हें किसी धर्म या समुदाय विशेष में बांधना न सिर्फ उनके मान को छोटा करना होगा बल्कि उनका अपमान करना होगा. उन्होंने कहा कि सांगठनिक स्तर से इसका तीव्र प्रतिवाद किया जायेगा.
एआइवाईएफ के जिला कमेटी सदस्य नवाबुद्दिन खान ने कहा कि भगत सिंह महान विचारधारा वाले व्यक्तित्व थे. फांसी से कुछ क्षण पूर्व लेनिन की जीवनी पढ़ते समय जब अंग्रेजी सिपाहियों ने उनसे पूछा कि क्या कर रहे तो उन्होंने निर्भयतापूर्वक जवाब दिया कि एक विप्लवी दूसरे विप्लवी से मिल रहा है.
भगत सिंह जैसे महान शख्सियत के धार्मिकीकरण का सख्त लहजे में विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कदम उठाने वाले लोग संकीर्ण मानसिकता के हैँ. उन्हें जाति, धर्म के बंधनों में बांधना उनका अपमान करना है. सीपीएम के युवा संगठन डीवाईएफआइ के जिला सचिव हेमंत प्रभाकर ने कहा कि भगत सिंह कुरीतियों से मुक्त भारत और समानता का स्वप्न देखते थे. उनकी महान विचारधारा और शहादत को धर्म के बंधन में बांधना उनकी शहादत को संकीर्ण करना है.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पश्चिम बर्दवान जिला प्रमुख अमित कुमार रजक ने कहा कि भगत सिंह गर्व हैँ. वे युवाओं के लिए प्रेरणा के स्तंभ हैँ. उन्हें किसी धर्म से जोडना उनके महत्व को छोटा करना है. यह युवा वर्ग को कतई स्वीकार नहीं होगा. पूरी दुनिया में उनकी पहचान और सम्मान है. यदि प्रतिमा पूर्व स्थिति में न लाई गई तो संगठन स्तर से प्रतिवाद किया जायेगा.
किसी भी कीमत पर उनकी प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा. एबीवीपी के पश्चिम बर्दवान जिला प्रचारक सोमनाथ मुखर्जी ने कहा कि सशस्त्र आंदोलन के पक्षधर भगत सिंह देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा स्त्रोत बने रहेंगे.
भगत सिंह के नाम पर धर्म या राजनीति करने वाले लोग भगत सिंह को पूरी तरह नहीं जानते होंगे. क्योंकि जो भगत सिंह को जानते हैँ वे ऐसी ओछी सोच रख ही नहीं सकते हैँ. उन्होंने कहा कि उनका धार्मिकीकरण करना उनके कद को छोटा करना है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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