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कूड़ेदान की कमी से तालाब को ही बना डाला कूड़ेदान

7 Jan, 2020 1:41 am
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कूड़ेदान की कमी से तालाब को ही बना डाला कूड़ेदान

वार्ड संख्या 60 मेंसफाई की स्थिति नियमित कचरा फेंके जाने से तालाब का अस्तित्व संकट में पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने से पूरे इलाके में फैली है बदबू सफाई को लेकर प्रशासनिक उदासीनता से लोगों में भारी आक्रोश आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 60 अंतर्गत विभिन्न इलाकों में सफाई की लचर […]

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वार्ड संख्या 60 मेंसफाई की स्थिति

नियमित कचरा फेंके जाने से तालाब का अस्तित्व संकट में

पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने से पूरे इलाके में फैली है बदबू

सफाई को लेकर प्रशासनिक उदासीनता से लोगों में भारी आक्रोश

आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 60 अंतर्गत विभिन्न इलाकों में सफाई की लचर व्यवस्था के कारण जगह-जगह कूड़े का ढ़ेर लोगों के लिए समस्या का कारण बन गया है. कूड़ेदान न होने से लोग तालाब को ही कूड़ेदान में तब्दील कर दिया है. जिससे तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है.

पानी की निकासी व्यवस्था सही नहीं होने से लोगों के घर के सामने ही पानी सड़ रहा है. इससे इलाके में मच्छरजनित बीमारी फैलने की संभावना प्रबल है. पार्षद अनिता साव ने कूड़ेदान और सफाई कर्मियों की कमी बताते हुए कहा कि नगर निगम से प्राप्त संसाधनों का सही उपयोग कर इलाके में सफाई व्यवस्था दुरुस्त की गई. पार्षद का बयान जमीनी हकीकत से काफी दूर है.

आंखों देखी

वार्ड संख्या 60 अंतर्गत राधानगर, बामनडीहा, लिथूरिया रोड, बामनडीहा बस्ती संलग्न इलाकों में कई स्थानों पर गंदगी की भरमार है. पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से घरों से निकलने वाली घर के सामने ही सड़ रहा है. जिसमें मच्छरों के लार्वा पनप रहा है. इलाके में कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं होने से लोग घरों की गंदगी निकटवर्ती इलाकों में फेंकने को बाध्य होते हैं.

जिससे आये दिन इलाकेवासियों का एक दूसरे के साथ विवाद होता रहता है. बामनडीहा बस्ती इलाके में कूड़ेदान नहीं होने से लोग घरों का कूड़ा इलाके के मोहन तालाब में फेंक रहे हैं. जिससे तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. यह तालाब धीरे-धीरे कचरे से भरता जा रहा है.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

बामनडीहा निवासी रमेश कुमार ने कहा कि वार्ड में सफाई कर्मी नियमित रूप से नहीं आते हैं. जब आते हैं तो अपने हिसाब से जैसे-तैसे सफाई करके निकल जाते हैं. उन्हें कुछ भी बोलने पर वे कुछ भी नहीं सुनते हैं.

बामनडीहा निवासी अजय दास ने कहा कि इलाके में पिछले एक साल से थोड़ी बहुत सफाई आरंभ की गयी है. पहले तो यहां के लोग नरकीय परिवेश में रहने को विवश थे. घरों से निकलने वाले गंदे पानी को मुख्य नाली जोड़ने की उचित व्यवस्था नहीं होने से घरों के सामने पानी सड़ता है. जिसमें मच्छर का लार्वा पनपता है. कीटनाशक का छिड़काव नहीं होने से मच्छर के आतंक से लोग परेशान हैं. शाम होते ही मच्छरों के हमला काफी तेज होता है.

बामनडीहा बस्ती निवासी मोहम्मद हिदायतुल्लाह ने कहा कि इलाके में सफाई तो होती है. परंतु कूड़ेदान नहीं होने से कुछ लोग घरों का के कूड़ा पास के ही मोहन तालाब में फेंक कर चले जाते हैं.

बामनडीहा निवासी सुरज प्रसाद ने कहा कि पार्षद को बोले जाने के बाद भी पिछले चार वर्षों में इलाके में कूड़ेदान नहीं दिया गया. सफाई कर्मी भी इलाके का कूड़ा एक स्थान से दूसरे स्थान पर इकट्ठा कर चले जाते हैं. यही कूड़ा वापस इलाके के चारों ओर फैल जाता है. कुछ लोग घरों का कूड़ा इलाके के मोहन तालाब में फेंक कर चले जाते हैं. जिससे तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. इलाके के लोग पर्व त्योहारों व अन्य अनुष्ठानों में इसका उपयोग करते हैं.

बामनडीहा बस्ती निवासी मीराज खान ने कहा कि इलाके में फॉगिंग मशीन का उपयोग या ब्लिचिंग पावडर का छिड़काव नहीं किये जाने से मच्छर का प्रकोप काफी बढ़ा हुआ है. जिससे मच्छरजनित रोगों का खतरा है. सफाई कर्मी नियमित रूप से आते पर कीटनाशक और ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव नहीं करते हैं.

बामनडीहा निवासी सहदेव प्रसाद ने कहा कि कूड़ेदान न होने के कारण लोग कहीं भी कचरा फेंक देते हैं. सफाई कर्मी इलाके का कचरा उठाकर गनीनाथ मंदिर के पास के खाली मैदान में फेंक कर चले जाते हैं. हवा चलने पर यह कचरा चारों ओर बिखर जाता है. कूड़ेदान नहीं होने से पूरे इलाके में कचरा भरा पड़ा है.

बामनडीहा लिथुरिया रोड निवासी तनवीर अंसारी ने कहा कि इलाके में कीटनाशक का छिड़काव नहीं होने से मच्छरजनित रोगों का भय बना रहता है. बरसात में काफी परेशानी होती है.

क्या कहती हैं पार्षद?

वार्ड पार्षद अनिता साव ने कहा कि निगम की ओर से उपलब्ध संसाधनों से वार्ड के हर इलाके में बेहतर सफाई व्यवस्था का प्रयास किया जाता है. दस हजार की आबादी वाले इस वार्ड में नगर निगम से दिये गये 18 सफाई कर्मियों द्वारा नियमित इलाकों की सफाई करायी जाती है. वार्ड की आबादी के अनुरूप पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं होने से सफाई में थोड़ी परेशानी होती है. कूड़ेदान की कमी से इलाके में जहां-तहां गंदगी पड़ी रहती है. नगर निगम की ओर से एक भी कूड़ेदान नहीं बनाया गया है.

निगम मुख्यालय से कूड़ेदान की मांग की गयी थी. चार वर्ष बीतने के बाद भी कूड़ेदान नहीं मिला है. इसीएल प्रबंधन ने वार्ड के कुछ इलाकों में कूड़ेदान बनाया. महीने में एक बार फॉगिंग मशीन का उपयोग किया जाता है. जरूरत के आधार पर ब्लिचिंग पावडर और कीटनाशक का छिड़काव होता है.

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