कलकत्ता उच्च न्यायलय के निर्देश पर राज्य सरकार ने की अधिसूचना जारी
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शिल्पांचल में कोयले की निगरानी करेंगे कृष्णेन्दू
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कलकत्ता उच्च न्यायलय के निर्देश पर राज्य सरकार ने की अधिसूचना जारी अवैध कोयल कारोबार पर रोक लगाने और इसीएल के आवासों को अवैध कब्जा मुक्त करने को लेकर दायर रिट पिटिशन की सुनवाई पर अदालत का आदेश मामले में सुनवाई आज, राज्य सरकार अधिकारी की नियुक्ति की अधिसूचना अदालत में करेगी पेश, अदालत की […]

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अवैध कोयल कारोबार पर रोक लगाने और इसीएल के आवासों को अवैध कब्जा मुक्त करने को लेकर दायर रिट पिटिशन की सुनवाई पर अदालत का आदेश
मामले में सुनवाई आज, राज्य सरकार अधिकारी की नियुक्ति की अधिसूचना अदालत में करेगी पेश, अदालत की मंजूरी के बाद अधिकारी की होगी तैनाती
आसनसोल : कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार के इंडस्ट्री, कामर्स और इन्टरप्राइसेस विभाग माइन्स शाखा के अतिरिक्त सचिव एस. हजारा ने शिल्पांचल में कोयले पर निगरानी और इसीएल के आवास तथा जमीन को अवैध कब्जा मुक्त कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए पश्चिम बंगाल मिनिरल डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सह नोडल अधिकारी कृष्णेन्दू साधुखां (आईएएस) को इस कार्य के लिए एस्टेट ऑफिसर के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की.
इससे पूर्व इस कार्य के लिए सरकार ने जिला शासक शशांक सेठी की नियुक्ति की थी. जिसे आदलत ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि एक व्यक्ति दो पद का दायित्व सही तरीके से नहीं संभाल सकता है. जिसके उपरांत श्री साधुखां की नियुक्ति की अधिसूचना बुधवार को जारी हुई.
सनद रहे कि अंडाल निवासी अधिवक्ता पार्थो घोष की रिट पिटिशन पर 19 जुलाई 2019 को सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन और न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पश्चम बर्दवान, पुरुलिया, बीरभूम और बांकुड़ा चार जिलों में कोयले के अवैध कारोबार पर निगरानी और इसीएल के आवासों पर अवैध कब्जा मुक्त करने दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए एक काबिल अधिकारी को नियुक्त करने का आदेश दिया था.
आदेश में कहा गया था कि नियुक्त अधिकारी के पास सीआरपीसी, पब्लिक प्रिमिसेस (एविक्शन एंड अनऑथोराइज अक्यूपेंट्स) एक्ट 1971 को लागू करने का पूर्ण अधिकार हो और राज्य की पुलिस सम्बंधीय कानून का अंत तक प्रयोग कर रिट पिटिशन में दायर मुद्दों की रक्षा करने में सक्षम हो.
27 सितम्बर, 22 नवम्बर और 13 दिसम्बर 2019 को हुई सुनवाई में भी राज्य सरकार द्वारा अदालत के आदेश पर अधिकारी की नियुक्ति की दिशा में कोई पहल नहीं होने पर 13 दिसम्बर की सुनवाई में अदालत ने सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए अंतिम मौका दिया. जिसके उपरांत राज्य सरकार की गृह विभाग ने ऊक्त अधिकारी के रूप में जिला शासक श्री सेठी की नियुक्ति की थी. जिसे अदालत ने 20 दिसम्बर को हुई सुनवाई में नकार दिया था. 17 जनवरी 2020 को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने काबिल अधिकारी की नियुक्ति को लेकर अदालत से अधिकारी चिन्हित के आदेश जारी करने की अपील की.
जिसपर खंडपीठ के न्यायाधीशों ने कहा कि यह कार्य आदलत का नहीं है. राज्य सरकार चिन्हित करे कि किस अधिकारी को तैनात करना है. जिसकी सूचना पब्लिक नोटिस के माध्यम प्रकाशित करने को कहा था. मामले की अगली सुनवाई सात फरवरी 2019 को होने से पूर्व राज्य सरकार ने श्री साधुखां की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की.
अदालत ने सुनवाई में क्या आदेश दिया?
17 जनवरी की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन और अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा में राज्य पुलिस की काफी खामियां नजर आ रही हैं.
कोयला खनन का अधिकार एकमात्र सरकार द्वारा अधिकृत संस्था का है. राज्य पुलिस को उन्हें संरक्षण देना होगा. अवैध खदान बनाकर या अधिकृत संस्था के कोयले की चोरी रोकनी होगी. पुलिस की ड्यूटी सिर्फ जांच करने तक ही सीमित नहीं है. कानून के दायरे में अधिकार का सही उपयोग कर रक्षा भी करना है. पुलिस की कार्रवाई निराशाजनक हुई तो 22 नवम्बर को जारी आदेश से अदालत पीछे नहीं हटेगी.
अदालत ने एडीपीसी के पुलिस आयुक्त और तीन जिला के पुलिस अधीक्षक को कोयले के अवैध कारोबार को रोकने में युद्धकालीन तत्परता के तहत सख्त कार्रवाई करने को कहा. पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी को निभाने और अदालत के आदेश के अनुपालन में अवहेलना करते हैं तो वे खुद अपनी बर्बादी के जिम्मेदार होंगे. बिना नाकामी के पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र में कोयले के एक ढ़ेले का भी अवैध कारोबार नहीं हो रहा है.
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