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खुशखबरी: महानगर के बांसद्रोणी में किन्नरों को मिली अनोखी सौगात, थर्ड जेंडर के लिए त्रिधारा शौचालय

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कोलकाता : दक्षिण कोलकाता के वार्ड संख्या-112 स्थित बांसद्रोणी इलाके में किन्नरों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की गयी है, जिसका नाम रखा गया है-त्रिधारा (तिसरी शक्ति). इसके साथ ही कोलकाता देश का ऐसा पहला शहर बन गया, जहां तिसरे लिंग (थर्ड जेंडर) के लिए ऐसी व्यवस्था की गयी है. किन्नरों को यह सुविधा […]

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कोलकाता : दक्षिण कोलकाता के वार्ड संख्या-112 स्थित बांसद्रोणी इलाके में किन्नरों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की गयी है, जिसका नाम रखा गया है-त्रिधारा (तिसरी शक्ति). इसके साथ ही कोलकाता देश का ऐसा पहला शहर बन गया, जहां तिसरे लिंग (थर्ड जेंडर) के लिए ऐसी व्यवस्था की गयी है. किन्नरों को यह सुविधा दिलाने में 21 वर्षीय छात्र शोभन मुखर्जी की अहम भूमिका है.
शोभन ने ही स्थानीय पार्षद अनिता कर मजुमदार की मदद से बांसद्रोणी इलाके में ट्रांसजेंडर के लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था करायी. छात्र ने इस शौचालय का नामकरण भी किया. शोभन का कहना है कि पुरुष और महिला के बाद ट्रांसजेंडर समाज में तिसरी शक्ति के रूप में विद्यमान हैं. गौरतलब है कि समाज में किन्नरों के हेय दृष्टि से देखा जाता है. उनके साथ भेद-भाव किया जाता है. ऐसे में त्रिधारा की सुविधा मिलने से किन्नरों में उम्मीद जगेगी कि शायद उन्हें भी समाज में सम्मान और समान अधिकार मिले, जिसके वे हकदार हैं. बता दें कि राज्य में किन्नरों के विकास और उनकी देखरेख के लिए शिशु व बाल कल्याण मंत्री डॉ शंशि पांजा के नेतृत्व में वेस्ट बंगाल ट्रांसजेंडर बोर्ड का गठन किया गया है. इसके बावजूद इन्हें समाज में समान अधिकार नहीं मिल पा रहा है.
छात्र की पहल सराहनीय, सरकार सम्मानित करे
किन्नरों की मदद, रोजगार, शिक्षा एवं चिकित्सा के लिए एक बोर्ड बनाया गया है. लेकिन दु:ख की बात है कि हम ऐसे लोगों के विकास के लिए विशेष कार्य नहीं कर पा रहे हैं. गत 20 वर्षों से जिस कार्य को हम नहीं कर सके है उसे शोभन ने कर दिखाया. इस छात्र को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को उसे सम्मानित करना चाहिए. राज्य में कितने ट्रांसजेंडर हैं, इसकी सटीक जानकारी हमारे पास नहीं. सरकार को पहले किन्नरों की संख्या का पता लगाना चाहिए. एक गैर सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, महानगर में आठ हजार एवं पूरे राज्य में करीब 30 हजार किन्नर हैं.
रंजीता सिन्हा, सदस्य, वेस्ट बंगाल ट्रांसजेंडर बोर्ड सह उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ ट्रांसजेंडर / हिजरा इन वेस्ट बंगाल .
शोभन ने बताया कि वार्ड संख्या-112 में पांच पे एंड यूज टॉयलेट हैं. इनमें से चार सार्वजनिक शौचालयों में किन्नरों के लिए अलग व्यवस्था की गयी है. ट्रांसजेंडरों के लिए बनाये गये टॉयलेट पर त्रिधारा लिखा स्टीकर चस्पा दिया गया है. प्रत्येक सार्वजनिक शौचालय में पुरुष के लिए छह एवं महिलाओं के लिए छह टॉयलेट हैं. पुरुष और महिला के हिस्से में से एक-एक टॉयलेट को थर्ड जेंडर के लिए आरक्षित कर दिया गया है. वार्ड संख्या 100 में भी ऐसा किया गया है. स्थानीय पार्षद की मदद से वार्ड के तीन सार्वजनिक शौचालयों में भी त्रिधारा की व्यवस्था की गयी है. नाकतल्ला, गड़िया एवं पाटुली स्थित सार्वजनिक शौचालयों में त्रिधारा नामक टॉयलेट खोला गया है. जियोग्राफी ऑनर्स पढ़ रहा शोभन पूरे महानगर में ट्रांसजेंडरों के लिए ऐसी व्यवस्था करना चाह रहा है.
किन्नरों के लिए अलग शौचालय निर्माण को हम प्राथमिकता दे रहे हैं. क्योंकि इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं या पुरुषों के लिए बने शौचालय का उपयोग करना पड़ता है. इस काम में फंड की कमी आड़े आ रही है, लेकिन सरकार इस समस्या का समाधान कर लेगी.
शशि पांजा, महिला व बाल विकास मंत्री, पश्चिम बंगाल.
दो सप्ताह पहले 112 नंबर वार्ड में त्रिधारा शौचालय का शुभारंभ किया गया. एक पार्षद के रूप में जितना हो सका, मैंने मदद की. शोभन के इस कार्य से से थर्ड जेंडर को सम्मान के साथ एक नयी दिशा मिलेगी.
अनिता कर मजुमदार, पार्षद, वार्ड संख्या-112 (कोलकाता नगर निगम)

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