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मालदा : जिले के रेशम किसान हो रहे हैं मालामाल

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मालदा : केन्द्र सरकार ने भले ही उपेक्षा की हो, लेकिन राज्य सरकार की मदद से जिले के रेशम पालक एक बार फिर से रेशम की खेती कर मुनाफा कमाने में जुट गये हैं. रेशम किसानों के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर कई योजनाएं चलायी गई हैं. इसी का लाभ मालदा […]

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मालदा : केन्द्र सरकार ने भले ही उपेक्षा की हो, लेकिन राज्य सरकार की मदद से जिले के रेशम पालक एक बार फिर से रेशम की खेती कर मुनाफा कमाने में जुट गये हैं. रेशम किसानों के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर कई योजनाएं चलायी गई हैं.
इसी का लाभ मालदा जिले के कालियाचक इलाके के रेशम पालक उठा रहे हैं. उनकी आय में दोगुनी वृद्धि हुई है. रेशम पालकों का कहना है कि चीनी रेशम के उत्पादन से ही आय बढ़ाने में सफलता मिली है. रेशम पालन के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी की गई.
मिली जानकारी के अनुसार, रेशम किसान पांच हजार रुपये खर्च करीब 15 से 18 हजार रुपये कमा रहे हैं. कृषि विभाग के अधीन रेशम विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कालियाचक-1 तथा 2 ब्लॉक के करीब 22 हेक्टेयर जमीन पर रेशम की खेती होती है. पिछले साल 15 सौ मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन हुआ था. इसमें देशी तथा चीनी प्रजाति का रेशम भी शामिल है. जिले के करीब एक लाख लोग इस काम से जुड़े हुए हैं. कालियाचक के बामनग्राम, मोसिमपुर, पहाड़पुर, खिखिरबना, अलीनगर, शिलमपुर, अलीपुर सहित विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर रेशम की खेती हो रही है. रेशम की खेती के लिए मुख्य रूप से जमीन पर रेशम के पौधे तथा रेशम कीट की जरूरत होती है. उनके संरक्षण से बड़े पैमाने पर रेशम का उत्पादन संभव है. मोसिमपुर डेवलपमेंट सोसायटी के सदस्य तथा एक रेशम उत्पादक आजाद अली तथा संजय मंडल आदि ने बताया है कि चीनी प्रजाति के रेशम कीट से रेशम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण उन्होंने प्राप्त किया है.
राज्य सरकार से प्रशिक्षण में मदद मिली है. एक बीघा जमीन पर रेशम की खेती में करीब पांच हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि रेशम सूत का उत्पादन कर उसकी बिक्री 18 हजार रुपये में की जाती है. इन लोगों ने बताया कि राज्य सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के द्वारा रेशम की खेती में सहायता दी जा रही है. इस संबंध में राज्य रेशम विभाग के मालदा के डिप्टी डायरेक्टर मनोज कुमार बैद ने कहा है कि रेशम किसानों को हर प्रकार की सहायता दी जा रही है. किसान रेशम का उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

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