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मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

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कोलकाता : देश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बुधवार सुबह आग लगने से अस्पताल में अफरातफरी फैल गयी. हेरिटेज में शामिल एमसीएच बिल्डिंग के बेसमेंट में स्थित फार्मेसी विभाग में लगी थी. घटना के वक्त यहां 253 से 350 मरीज मौजूद थे. इस बिल्डिंग में हेमाटोलॉजी, कॉर्डियोलॉजी व […]

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कोलकाता : देश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बुधवार सुबह आग लगने से अस्पताल में अफरातफरी फैल गयी. हेरिटेज में शामिल एमसीएच बिल्डिंग के बेसमेंट में स्थित फार्मेसी विभाग में लगी थी. घटना के वक्त यहां 253 से 350 मरीज मौजूद थे.
इस बिल्डिंग में हेमाटोलॉजी, कॉर्डियोलॉजी व मेडिसीन विभाग हैं. यहां कार्डियोलॉजी का आइसीयू विभाग भी है, जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भर्ती रखा जाता है. घटना के दौरान इस विभाग में 14-15 मरीज भर्ती थे. बिल्डिंग के सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. मरीजो‍ं को अस्पताल के इमरजेंसी विभाग, एजरा बिल्डिंग व चाइल्ड एं‍ड मदर केयर हब में शिफ्ट किया गया है.
घटना की छानबीन के लिए अस्पताल प्रबंधन ने छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है. घटना के बाद राज्य के दमकल व स्वास्थ्य राज्य मंत्री व कई आला नेता मौके पर पहुंचे. स्वास्थ्य राज्यमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य अपराह्न 1.45 बजे अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने अस्पताल पहुंच कर इमरजेंसी वार्ड का दौरा किया, जहां कुछ मरीजों को अस्थायी रूप से रखा गया है.
मंत्री ने कहा कि सभी मरीजों सुरक्षित निकाल लिया गया है. श्रीमती भट्टाचार्य के साथ डॉ निर्मल मांझी व स्वास्थ्य सेवा निदेशक प्रो डॉ प्रदीप मित्रा भी मौजूद थे. मंत्री ने बताया कि अस्पताल के फार्मेसी विभाग में लाइफ सेविंग ड्रग के अलावा कैंसर व अन्य बीमारियों की कीमती दवाएं स्टोर कर रखी जाती हैं. आग लगने के कारण सभी दवाओं नष्ट हो गयी हैं.
पांच करोड़ की दवाएं नष्ट : अधिकारी
उधर, अस्पताल के फार्मेसी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि घटना के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये की दवाएं थीं, जो नष्ट हो गयी हैं. अग्निकांड में अस्पताल की करीब एक महीने तक इस्तेमाल होनेवालीं दवाएं खराब हो गयी हैं. यहां मौजूद 90 फीसदी दवाएं जलकर खाक हो गयी हैं. जो बाकी दवाइयां हैं, वे आग की ताप की वजह से इस लायक नहीं बची हैं कि रोगियों के लिए इस्तेमाल की जा सकें.
इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के पास इससे संबंधित रिपोर्ट भेजी गयी है और तत्काल प्रभाव से इन दवाओं को मुहैया कराने का आवेदन किया गया है. बुधवार की सुबह आग लगने के बाद सबसे बड़ी समस्या अब इस बात की है कि यहां भर्ती हजारों रोगियों को दवा कहां से दी जायेंगी. उन्होंने उम्मीद जतायी कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द सारी दवाइयां मुहैया करा दी जायेंगी.
छह सदस्यीय जांच कमेटी का गठन :
अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन डॉ निर्मल मांझी ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना के पीछे साजिश है. इसलिए पूरे मामले की छानबीन के लिए छह सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में अस्पताल अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ आशीष बोस, अस्पताल अधीक्षक प्रो डॉ इंद्रनील विश्वास, प्रो डॉ रामानुज सिन्हा विभागाध्यक्ष इएनटी, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ शांतनु सिन्हा, विभागाध्यक्ष मेडिसीन, पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिकल के सुपरिटेंडेंट को इस टीम में शामिल किया गया है. कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है. उन्होंने कहा सेंट्रल मेडिकल स्टोर से शाम से दवा मंगायी जायेगी.

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