2018 में बैंकिंग सेक्टर में करीब 3,000 सुरक्षा गार्डों की नौकरियां चली गयी थीं
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अपने भविष्य को लेकर चिंतित है ‘चौकीदार’
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2018 में बैंकिंग सेक्टर में करीब 3,000 सुरक्षा गार्डों की नौकरियां चली गयी थीं कोलकाता : पिछले कुछ वक्त से देश में चौकीदारों पर चर्चा ने तेजी पकड़ी है लेकिन कोलकाता के सुरक्षा गार्डों (चौकीदार) का भविष्य अधर में लटका हुआ है. पश्चिम बंगाल में साल 2018 में बैंकिंग सेक्टर में करीब 3,000 सुरक्षा गार्डों […]

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कोलकाता : पिछले कुछ वक्त से देश में चौकीदारों पर चर्चा ने तेजी पकड़ी है लेकिन कोलकाता के सुरक्षा गार्डों (चौकीदार) का भविष्य अधर में लटका हुआ है. पश्चिम बंगाल में साल 2018 में बैंकिंग सेक्टर में करीब 3,000 सुरक्षा गार्डों की नौकरियां चली गयी थीं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि उद्योग में हालात कितने अस्थिर हैं.
जानकारों की मानें तो जीएसटी और रिजर्व बैंक के नियमों ने सुरक्षा गार्डों के जीवन में परेशानी खड़ी कर दी थी. रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, बैंक केवल उन सुरक्षा एजेंसियों को रख सकते हैं, जिनकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपये हो और जिनमें कम से कम 300 स्पेशल फैब्रिकेटेड कैश वैन हों.
पिछले 15 साल से एक प्राइवेट बैंक में काम कर रहे अबू सलाम सरदार को 5 मार्च को जाने के लिए कह दिया गया. उनकी पत्नी को कैंसर है और सरदार के पास कोई नौकरी नहीं है. इसी तरह गणेश दास भी जिस बैंक में 14 साल से नौकरी कर रहे थे, बीते 18 मीर्च को उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया गया. वह बताते हैं कि करीब दो महीने पहले दूसरे लोगों को निकाला गया था, लेकिन उन्हें भी निकाल दिया जायेगा, यह उन्होंने सोचा नहीं था.
पिछले साल से बदला है ट्रेंड
अचानक गार्डों को नौकरी से निकाले जाने के अलावा एक और बात है, जिसने विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. दरअसल, 2004-05 में जहां इनका वेतन 2,200 प्रति माह होता था, वहीं 2009 में 5,000 और हाल ही में 17,200 पर पहुंच गया थी. जानकारों का कहना है कि बंगाल में प्राइवेट सिक्यूरिटी इंडस्ट्री हर साल 20 फीसदी बढ़ रही थी लेकिन पिछले साल से यह ट्रेंड बदल गया.
जीएसटी के बाद से बढ़ी है परेशानी
कोलकाता की एक सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 18 फीसदी जीएसटी से बहुत फर्क पड़ा है. उन्होंने बताया है कि केंद्र ने आश्वासन दिया था कि जीएसटी रिवर्स चार्ज आधार पर लागू होगी, जीएसटी को सर्विस लेनेवाले को चुकाना होगा, प्रोवाइडर को नहीं, लेकिन वह अपनी बात से पीछे हट गये और कॉर्पोरेट को इससे बाहर कर दिया. उन्होंने बताया कि इसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा चुका है.
उन्होंने कहा कि लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राजनीतिक दल केवल भाषणों से चौकीदारों को खुश करने की जगह उनके मुद्दों को सुलझाने का काम करें. वहीं, रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की कुल कीमत 100 करोड़ होनी चाहिए और उनके पास 300 कैश वैन होने चाहिए. कोलकाता में केवल दो सुरक्षा एजेंसियों के पास 300 कैश वैन हैं लेकिन वह 100 करोड़ के आंकड़ों से दूर हैं.
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