मैत्री-क्षमा भाव से सबको साथ लेकर चलें : आचार्य विनयसागर

फोटोकोलकाता. युग प्रधान श्री पार्श्वचंद्र सुरिश्वरजी की 459वीं स्वर्गारोहण जयंती के उपलक्ष्य में गुणानुवाद सभा एवं आचार्यश्री विनयसागर सुरिश्वरजी की संयम अनुमोदना, दीक्षा दिवस तथा आचार्य पदवी दिवस के अवसर पर श्री वर्धमान जैन संघ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में गुरु पूजन के पश्चात् आचार्य विनयसागर सुरिश्वरजी ने जीवन में गुणवान बनने, मैत्री-क्षमा भाव रखते […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 25, 2014 7:03 PM

फोटोकोलकाता. युग प्रधान श्री पार्श्वचंद्र सुरिश्वरजी की 459वीं स्वर्गारोहण जयंती के उपलक्ष्य में गुणानुवाद सभा एवं आचार्यश्री विनयसागर सुरिश्वरजी की संयम अनुमोदना, दीक्षा दिवस तथा आचार्य पदवी दिवस के अवसर पर श्री वर्धमान जैन संघ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में गुरु पूजन के पश्चात् आचार्य विनयसागर सुरिश्वरजी ने जीवन में गुणवान बनने, मैत्री-क्षमा भाव रखते हुए अच्छे संस्कारों को अपना कर सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा दी. मुनिश्री रवि पद्मसागरजी ने कहा कि पूर्वी भारत में चातुर्मास के समय आचार्य विनयसागर सुरिश्वरजी की प्रेरणा से बंगाईगांव (असम), सिलीगुड़ी, मोतीलाल नेहरू रोड (कोलकाता), उत्तर हावड़ा में जैन मंदिर निर्माणाधीन है. उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण मार्बल पत्थरों से होता है, लेकिन हृदय रूपी मंदिर मंे धार्मिक आस्था, चेतना जागृत करने का कार्य संत-महात्मा करते हैं. उन्होंने कहा कि मुगल शासकों का मार्गदर्शन तत्कालीन जैनाचार्य करते थे. महाराजा विक्रमादित्य के शासन से प्रारंभ विक्रम संवत् का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जैन धर्म में भाव की प्रधानता है. भाव शुद्ध होने से सभी कार्य सफल होते हैं. भजन गायक मोहनलाल बरडि़या, अशोक बांठिया, दिलीप दुगड़ ने अभिवादन संतों का श्रद्धा के फूलों से एवं भक्ति भजन सुना कर भाव-विभोर किया. गुणानुवाद सभा में टीकमचंद डागा, मोहनलाल कोचर, अशोक जैन, नरेंद्र बांठिया ने अपने विचार व्यक्त किये. संचालन मुल्तानचंद सुराणा ने किया. आयोजन की सफलता के लिए सरदारमल बांगाणी, माणकचंद सेठिया, मगनमल रामपुरिया, विजयचंद वैद, जयचंद लाल दुगड़, विनीत रामपुरिया एवं कार्यकर्ता सक्रिय रहे.