प्रेम से भगवान का स्मरण करो: कृष्ण प्रभु

कोलकाता. मानव जीवन में सिर्फ भगवान का भजन एवं स्नेह ही साथ में जाता है. यह जीवन अनमोल है. जितना समय मिले उसमें भगवान का स्मरण करना चाहिए, लेकिन इसमें प्रेम रहना चाहिए. भगवान प्रेम के भूखे हैं. मानव सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में मनीषी कुंडल कृष्ण प्रभु (इस्कॉन) ने रविवार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 22, 2015 8:04 PM

कोलकाता. मानव जीवन में सिर्फ भगवान का भजन एवं स्नेह ही साथ में जाता है. यह जीवन अनमोल है. जितना समय मिले उसमें भगवान का स्मरण करना चाहिए, लेकिन इसमें प्रेम रहना चाहिए. भगवान प्रेम के भूखे हैं. मानव सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में मनीषी कुंडल कृष्ण प्रभु (इस्कॉन) ने रविवार को कहा कि तुलसीदासजी ने कहा है कि जितना कम से कम समय भी मिले तो भगवान का प्रेम से स्मरण करना चाहिए. आजकल के जमाने में साधारण मनुष्य भी खुद को भगवान समझने लगे हैं और उनके अनुयायी ऐसा मानने भी लगे हैं. गुरु भगवान से भी ज्यादा दयालु होते हैं. गुरु और संत दोनों ही मानव जीवन के हितकर हैं. वे मानव को अच्छे रास्ते पर चलने का रास्ता दिखाते हैं. आज से लगभग 18 लाख वर्ष पहले भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र नवरात्र में हुआ था. राजा दशरथ उतना खुश नहीं थे जितना कि अयोध्या के समाजगण खुश थे. भगवान ने अपनी जीवन लीला दुष्टों का संहार कर समाप्त किया था. वनवास के दौरान उन्होंने कई राक्षसों का संहार किया. राम और कृष्ण दोनों ही एक हैं. दोनों के सिर्फ रूप में अंतर है. इससे पहले डॉ प्रेम शंकर त्रिपाठी, द्वारका प्रसाद गनेड़ीवाल, देवेंद्र भैया, कमल कांत बागड़ी, श्यामलाल डोकानिया, सत्यनारायण तिवाड़ी, लक्ष्मीनारायण कोठारी ने महाराजजी का माल्यार्पण कर स्वागत किया. संचालन महावीर प्रसाद रावत तथा कृष्ण कुमार सराफ ने धन्यवाद ज्ञापन किया.