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भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध केवल दिखावा : भाजपा

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आइसीसी के यंग लीडर्स फोरम की परिचर्चा में बोले संबित पात्र कहा : विधेयक का विरोध कर रहे दल बंद कमरे में होनेवाली स्थायी समिति की बैठक में नहीं लड़ते कोलकाता : भाजपा ने भूमि अधिग्रहण बिल को किसानों और विकास के हित में बताते हुए कहा कि तृणमूल द्वारा इसका विरोध कुछ और नहीं […]

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आइसीसी के यंग लीडर्स फोरम की परिचर्चा में बोले संबित पात्र
कहा : विधेयक का विरोध कर रहे दल बंद कमरे में होनेवाली स्थायी समिति की बैठक में नहीं लड़ते
कोलकाता : भाजपा ने भूमि अधिग्रहण बिल को किसानों और विकास के हित में बताते हुए कहा कि तृणमूल द्वारा इसका विरोध कुछ और नहीं बल्कि एक दिखावा है,
ताकि यह साबित किया जा सके कि केंद्र सरकार किसान विरोधी है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्र ने आइसीसी के यंग लीडर्स फोरम की ओर से आयोजित परिचर्चा में कहा कि 2013 में बनी एक आम सहमति के बाद तत्कालीन संप्रग सरकार ब्रिटिश काल के मौजूदा कानून को हटाने के लिए विधेयक आयी थी. जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बैठक बुलायी थी तब सभी मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधि इस पर सहमत हुए थे कि सहमति के प्रावधान या तो हटा दिये जाने चाहिए या उन्हें घटा कर 40-50 प्रतिशत कर देना चाहिए.
उन्होंने श्री गडकरी को पत्र लिख कर यहां तक कहा था कि सामाजिक प्रभाव के आकलन के विषय पर फैसला राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए. श्री पात्र ने कहा कि भाजपा सरकार को क्या करना होगा? संघवाद के सही सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए इस सरकार ने कहा कि जहां तक सहमति के प्रावधान की बात है,
सामाजिक प्रभाव के आकलन की बात है, सक्षम प्राधिकरण – राज्यों को फैसला लेने दें. अगर राज्य कोई खास परियोजना चाहते हैं तो वे 40-50 प्रतिशत की सहमति के साथ काम चला सकते हैं क्योंकि राज्य सबसे अच्छे निर्णायक हैं. हमने राज्यों को सशक्त किया है. उन्होंने कहा कि विरोध कुछ नहीं है केवल सार्वजनिक दिखावा है ताकि यह साबित किया जा सके कि भूमि विधेयक किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक है. विधेयक का विरोध कर रहे दल बंद कमरे में होने वाली स्थायी समिति की बैठक में नहीं लड़ते. वे केवल सदन के पटल पर लड़ रहे हैं जहां कैमरे लगे हैं.
आलू किसानों की बेहतरी को लेकर
पंजाब मॉडल अपनाने का हाइकोर्ट ने दिया सुझाव
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा : विज्ञा सम्मत कृषि से मिलेगा लाभ
कोलकाता : राज्य के आलू किसानों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार को पंजाब का मॉडल अपनाने की सलाह कलकत्ता हाइकोर्ट ने दी है.
हाइकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर व न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने अनिंद्य सुंदर दास द्वारा दायर मामले की सुनवाई में यह कहा. खंडपीठ ने कहा कि विज्ञान सम्मत कृषि से लाभ मिले हैं.
राज्य को भी पंजाब के कृषि मॉडल को अपनाना चाहिए. अतिरिक्त एडवोकेट जनरल लक्खी गुप्ता ने हाइकोर्ट के निर्देशानुसार आलू किसानों के विकास के लिए सुझाव अदालत में पेश किये. उन्होंने कहा कि राज्य में आलू किसानों के सामने संकट नहीं है. इस पर अदालत ने कहा कि तब आलू किसान क्यों मामला कर रहे हैं. क्या इस पर अदालत जांच का आदेश दे. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्य में शुक्रवार को भी एक आलू किसान ने आत्महत्या की है.
राज्य सरकार द्वारा 50 हजार मैट्रिक टन आलू खरीदने की बात थी लेकिन केवल 22 हजार मैट्रिक टन ही खरीदे गये. खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के सुझाव के एवज में अपने सुझाव देने के लिए कहा है. मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी.

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