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कंपलेक्स एंजियोप्लास्टी से अधिक उम्र में भी हृदय रोग का इलाज संभव

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कोलकाता. एक समय था जब अधिक उम्र में हृदय रोग होने पर रोगी को दवा के हवाले कर एक तरह से उसे गृह बंदी कर दिया जाता था, पर वर्तमान में कोलंबिया एशिया अस्पताल के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रंजन शर्मा उम्रदराज लोगों के जटिल हृदय रोगो का उपचार कंप्लेक्स एंजियोप्लास्टि की सहायता से बड़ी […]

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कोलकाता. एक समय था जब अधिक उम्र में हृदय रोग होने पर रोगी को दवा के हवाले कर एक तरह से उसे गृह बंदी कर दिया जाता था, पर वर्तमान में कोलंबिया एशिया अस्पताल के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रंजन शर्मा उम्रदराज लोगों के जटिल हृदय रोगो का उपचार कंप्लेक्स एंजियोप्लास्टि की सहायता से बड़ी आसामी से कर रहे हैं. डॉ शर्मा का कहना है कि आधुनिक मेडिकल साइंस के कारण लोगों के उम्र का प्रतिशत काफी बढ़ा है.

वहीं लाइफ स्टाइल रोग जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्टेरोल एवं कार्डियों वास्कूलर डिजीज अर्थात दिल की बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है. दिल की बीमारी का सटीक इलाज नहीं होने पर जान जाने का भी खतरा रहता है. डा. शर्मा ने बताया कि अधिकतर लोग किसी प्रकार की शारीरिक तकलीफ नहीं होने पर नियमित रुप से स्वास्थ्य जांच नहीं करवाते हैं.

इसलिए अचानक हॉर्ट अटैक होने पर रोगी की हालत आशंकाजनक हो जाती है. दिल में चक्रीय धमनी के द्वारा रक्त का संचार होता है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ रक्तवाही धमनियों के बीच में चरबी जमने लगती है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. धूम्रपान, अधिक वजन, मानसिक दबाव, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज इत्यादि इस की गति को बढ़ा देते हैं. इससे धमनी के बीच पत्थर के जैसा जमने लगता है. जिससे हृदय को जरूरी रक्त नहीं पहुंच पाता है. इससे ही दिल की विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती हैं. आमतौर पर हृदय रोग होने पर बाईपास सजर्री के बारे में विचार किया जाता है, पर अधिक उम्र एवं शारीरिक स्थिति के मद्देनजर बाइपास सजर्री करने में काफी खतरा रहता है. अत्याधुनिक यंत्र रोटाब्लेड में लगे हीरे की सहायता से धमनी में जमे पत्थर को तोड़ दिया जाता है. इसे एथेरोकटमी कहते हैं. जटिल व क्षतिग्रस्त करोनरी आर्टरी रोटाब्लेड की मदद से हटा कर बेलून एंजियोप्लास्टी किया जाता है. जिसे कंप्लेक्स एंजियोप्लास्टी कहा जाता है.

डॉ शर्मा ने बताया कि रोटाब्लेड की सहायता से धमनी के पत्थर को तोड़ने के लिए रोगी को बेहोश करने की जरूरत नहीं है. बेड के पास रखे मोनिटर पर रोगी स्वयं इस प्रक्रिया को देख सकता है. वृद्ध लोगों के लिए यह सबसे उपयोगी चिकित्सा पद्धति है.

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