यह बड़े शर्म की बात है. श्री आलम ने कहा कि शराब पी कर मरनेवालों को देखने के लिए ममता बनर्जी दौड़ी चली जाती हैं, पर फरजाना आलम जो उनकी पार्टी की एक अहम हस्ती थी, उन्हें देखने के लिए वह नहीं आयीं. जिस तरह से फरजाना आलम को अपमानित किया गया और चुनाव में पार्टी के लोगों ने उन्हें हराया, पार्टी प्रमुख होने के नाते ममता बनर्जी और सुब्रत बक्सी को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन कुछ भी नहीं किया गया. उनके ग्यारह वर्ष के बेटे के सिर पर कोई हाथ रखने तक नहीं आया.
अब जनता ही उसका फैसला करेगी. श्री आलम ने इलजाम लगाया कि तृणमूल कांग्रेस पर उनकी बहन की लाश के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वह जब तक जिंदा थीं, तब तक तृणमूल की सदस्य थी, पर मरने के बाद तो कम से कम उनकी लाश के साथ राजनीति नहीं की जाये. जब वह अस्पताल में भर्ती हुई थीं, तो उसे नाटक बताया जा रहा था, लेकिन जब उनकी मौत हो गयी तो उन लोगों को लगा कि भूल हो गयी है. उस भूल को सुधारने के लिए तृणमूल कांग्रेस उनकी लाश को विभिन्न जगह ले जा कर अपनी खराब हुई छवि को सुधारना चाहती थी, जो हमें मंजूर नहीं. उन्हें अस्पताल में कोई देखने तक नहीं आया, अब सहानुभूति दिखा रहे हैं.