विधानसभा चुनाव : समय से पहले केंद्रीय बल भेजने के फैसले पर जतायी कड़ी आपत्ति
राज्य में िवधानसभा चुनाव की तारीख तय व आचार संहिता लागू होने से पहले ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग व राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच तकरार बढ़ गयी है. दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
कोलकाता : राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा चंद ही दिनों के अंदर किये जाने की संभावना है. आमतौर पर किसी राज्य में चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ-साथ चुनावी आचार संहिता लागू होती है आैर उसके बाद ही आयोग वहां की कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रख कर कदम उठाता है. लेकिन लगता है कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति से संतुष्ट नहीं है. तभी तो पहली बार चुनाव आयोग चुनाव की तारीख से पहले ही केंद्रीय बल भेजने जा रहा है. इस फैसले से राज्य सरकार भड़क उठी है.
केंद्रीय बलों की 200 कंपनी भेजेगा आयोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले 200 केंद्रीय बलों की कंपनी भेजेगा. प्रथम चरण में एक मार्च को केंद्रीय बल की 100 कंपनियां में पहुंचे जायेंगी आैर केंद्रीय बलों की दूसरी 100 कंपनी सात मार्च को राज्य में आयेगी.
हर िजले में होगी तैनाती
आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय बल को राज्य के प्रत्येक जिले में तैनात किया जायेगा. कानून व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए इनका इस्तेमाल किया जायेगा. आयोग का कहना है कि लोगों का विश्वास एवं कानून व्यवस्था की स्थिति के प्रति उनकी आस्था को बनाय रखने के लिए यह फैसला लिया गया है.
िशकायतें िमलीं : आयोग
आयोग का कहना है कि कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में उउन्हें काफी शिकायतें मिली हैं, जिनके मद्देनजर ही यह कदम उठाया जायेगा. राज्य के एडीजी (कानून व्यवस्था) अनुज शर्मा ने चुनाव आयोग के इस फैसले से सभी जिलों के एसपी को अवगत करा दिया है.
चुनाव आयोग के पास कांग्रेस ने रखा अपना पक्ष : अधीर
कोलकाता : राज्य में होनेवाले विधानसभा चुनाव में केंद्रीय चुनाव आयोग से कांग्रेस ने बिहार मॉडल अपनाने की मांग की है. कांग्रेस प्रतिनिधि दल ने चुनाव आयोग की फुलबेंच के सामने अपना पक्ष रखा. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने बताया कि उन्होेंने आयोग से चुनाव के दौरान बिहार मॉडल अपनाने के लिए कहा है, जिसमें सुरक्षा का तगड़ा इंतजाम हो. श्री चौधरी ने कहा कि आयोग उनकी शिकायतों व समस्या से पहले ही अवगत है.
राज्य की हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में न्याय पाने के लिए राज्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ता है, उन्हें रोते हुए अपना पद छोड़ना पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बल को राज्य सरकार अपनी मनमर्जी से तैनात करती है. इस पर नजर रखी जानी चाहिए. हालांकि आयोग से उन्हें आश्वासन मिला है कि चुनाव के पहले और चुनाव के वक्त पर्याप्त संख्या में केंद्रीय बल भेजा जायेगा.
राज्य के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा
कानून व्यवस्था राज्य का मामला, आयोग का नहीं
कोलकाता : आयोग के इस फैसले पर तृणमूल भड़क उठी है. इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का मामला है. यह केंद्रीय गृह मंत्रालय का मामला नहीं है.
श्री चटर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग के काम के तरीकों से हम लोग अवगत हैं. देखते हैं क्या होता है. पार्टी में इस बारे में विचार विमर्श के बाद ही हम लोग अपनी बात रखेंगे. पंचायत मंत्री सुब्रत भट्टाचार्य ने भी आयोग के इस फैसले पर उंगली उठाते हुए कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार का मामला है. चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले केंद्रीय बल भेजने का फैसला कर एक नयी परंपरा को जन्म दिया है. जो सरासर गलत है.