आंकड़ों की धूल पर खिलता भाजपा का फूल
कोलकाता : देश के पांच राज्यों में साथ पश्चिम बंगाल में भी िवधानसभा चुनाव का िबगुल फूंक चुका है. हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है. िवजयश्री होने के लिए अपने पास अपने-अपने कारण भी हैं, जहां तृणमूल 2014 में हुए लोकसभा में और 2011 में हुए िवधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीट […]
कोलकाता : देश के पांच राज्यों में साथ पश्चिम बंगाल में भी िवधानसभा चुनाव का िबगुल फूंक चुका है. हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है. िवजयश्री होने के लिए अपने पास अपने-अपने कारण भी हैं, जहां तृणमूल 2014 में हुए लोकसभा में और 2011 में हुए िवधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीट जीतने को लेकर जीत का दावा कर रही है. वहीं, वामो व कांग्रेस अपने गंठबंधन को लेकर इतरा रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता आंकड़ों और अपनी रणनीति को लेकर राज्य में अपनी सरकार बनाने तक का भी दावा करते नजर आ रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में भाजपा को 17.01 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे, जिसे लेकर पार्टी नेता काफी उत्साहित हैं. भाजपा नेताओं का दावा है कि जिस प्रकार 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 27 विधानसभा क्षेत्रों में प्रथम जबकि 45 विधानसभा क्षेत्रों में द्वितीय स्थान पर रही थी, उसी प्रकार यदि इस बार भी वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी का आंकड़ा जारी रहता है तो बंगाल में भाजपा काफी बेहतर स्थान पर रहेगी.
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय दावा करते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 58 लाख वोट प्राप्त हुए थे. 27 सीटों पर प्रथम, जबकि 45 पर द्वितीय स्थान पर थे. श्री विजयवर्गीय कहते हैं कि 58 लाख का आंकड़ा इस बार 90 लाख के पार जायेगा और हम 72 विधानसभा सीटों पर विजयी होंगे. श्री विजयवर्गीय दावा करते हैं कि पिछले एक सालों में भाजपा ने बूथ स्तर पर काम किया है. इसी का नतीजा है कि इन दिनों बंगाल में 45 लाख लोग भाजपा के सदस्य हैं. वह कहते हैं कि बंगाल जैसे राज्य जहां की सरकार और विरोधी पार्टियां देशद्रोहियों का सपोर्ट कर रही है, वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर चलनेवाली सरकार की आवश्यकता है.
बंगाल की जनता को इन देशद्रोहियों से मुक्ति चाहिए. वह दावा करते हैं कि भाजपा बंगाल में सरकार बनायेगी. राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के गंठबंधन पर श्री विजयवर्गी कहते हैं कि आज राज्य के लोग कम्युनिस्ट पार्टी से नफरत करते हैं, जबकि कांग्रेस ने अपनी डूबती नैया को बचाने के लिए गंठबंधन किया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इतर यदि आंकड़ों पर गौर करें तो 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान टीएमसी को 39.86 प्रतिशत, लेफ्ट को 29.76 प्रतिशत, कांग्रेस को 8.68 प्रतिशत, जबकि भाजपा को 17.01 प्रतिशत वोट प्राप्त हुआ था. उस चुनाव में सबसे गौर करनेवाली बात यह थी कि भाजपा के वोट बैंक में 12.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.
हालांकि इस बावत टीएमसी और सीपीएम के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि उस वक्त मोदी की लहर थी, लेकिन आज मोदी विरोधी लहर है. लेकिन जानकार मानते हैं. इन दिनों भी देश में चल रही देशद्रोही बनाम देशभक्तों की लड़ाई ने भी भाजपा को बैठे-बिठाये एक बड़ा मुद्दा दे दिया है. इसी मुद्दे को लेकर इन दिनों भाजपा बंगाल के चुनाव समर में उतर रही है. इसके साथ ही सिंगुर के किसानों और राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को भी भाजपा अपना हथियार बना कर मैदान में उतरने जा रही है. बंगाल आने वाला भाजपा का हर केंद्रीय नेता भी अपने भाषणों में इन मुद्दों को जरूर उठाता है. हालांकि केंद्र में भाजपा सरकार के होने से भी बंगाल के भाजपा नेताओं में गजब का उत्साह और आत्मविश्वास दिख रहा है. चुनाव की घोषणा के बाद से भी पार्टियों की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है.
मीडिया वार रुम से विरोधियों की हो रही निगरानी : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कृषानु मित्रा कहते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान 294 सीटों में से मात्र 25 से 30 प्रतिशत बूथों पर ही भाजपा प्रतिनिधि थे, जबकि 75 प्रतिशत बूथों पर हमारे कार्यकर्ताओं को बैठने नहीं दिया गया, उसके बाद भी हमें 58 लाख वोट प्राप्त हुआ. इस बार हमारी तैयारी काफी पुख्ता है. हमने 70 से 75 प्रतिशत बूथ स्तर पर भाजपा कमेटी तैयार की है. बूथकर्मी सम्मेलनों का आयोजन कई महीनों से चल रहा है. भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती से भी निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद जगी है. इन सभी के साथ इस चुनाव में सोशल मीडिया का भी जोरदार इस्तेमाल हम करनेवाले हैं. इसके लिए भाजपा कार्यालय में मीडिया वार रूम बनाया गया है, जहां सोशल मीडिया के एक्सपर्ट 24 घंटे 2016 विधानसभा चुनाव की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे.
