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राज्य के स्कूलों में बिगड़ रही शिक्षा व्यवस्था

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भारती जैनानी कोलकाता : पश्चिम बंगाल में शिक्षा को लेकर जहां सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं स्कूलों में अब तक पाठ्यक्रम की सभी पुस्तकें वितरित नहीं की गयी हैं. पुस्तकों के अलावा शिक्षकों की कमी के कारण भी शिक्षा व्यवस्था चरमरा सी गयी है. सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों के हेडमास्टरों का कहना है […]

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भारती जैनानी
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में शिक्षा को लेकर जहां सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं स्कूलों में अब तक पाठ्यक्रम की सभी पुस्तकें वितरित नहीं की गयी हैं. पुस्तकों के अलावा शिक्षकों की कमी के कारण भी शिक्षा व्यवस्था चरमरा सी गयी है.
सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों के हेडमास्टरों का कहना है कि जनवरी से शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक स्कूलों में सभी किताबें उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं. कई स्कूलों में शिक्षकों के कई पद भी रिक्त हैं लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं की गयी है. खिदिरपुर के एक स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि सत्र शुरू हुए लगभग साढ़े तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक 9वीं व10वीं के बच्चों की प्रथम भाषा यानी हिंदी व गणित की किताबें नहीं मिली हैं. कई छात्र बाजार से या पुराने छात्रों से किताबें खरीद कर पढ़ रहे हैं. भामाशाह आर्य विद्यालय के हेडमास्टर एमपी सिंह ने बताया कि अब तक कक्षा छह की सभी किताबें नहीं मिली हैं.
हालांकि 11 अप्रैल से सरकारी स्कूलों को कक्षाएं रद्द रखने का आदेश दिया गया है लेकिन स्कूल में शिक्षक व हेडमास्टर उपस्थित हो रहे हैं. यह अवकाश कितने दिन चलेगा, इसकी भी फिलहाल कोई सूचना नहीं है. किताबों के अभाव व शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. ज्यादा छुट्टियों से भी बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है.
बिरलापुर विद्यालय (बजबज) के हेडमास्टर प्रमोदपति त्रिपाठी ने जानकारी दी कि पांचवी व छठी कक्षा में हिंदी की किताबें अब तक नहीं दी गयी हैं. छात्र किसी तरह काम चला रहे हैं. लाजपत हिंदी हाइ स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि आठवीं में अभी हिंदी की किताब छात्रों को नहीं मिल पायी हैं. इस विषय में चांपदानी आदर्श श्रमिक विद्या मंदिर के प्रधानाध्यापक कमलेश तिवारी ने बताया कि इस इलाके के तीनों हिंदी मीडियम स्कूलों में अब तक किताबें नहीं दी गयी हैं.
इसमें आर्य विद्यापीठ व रामदुलारी हिंदी हाइ भी स्कूल शामिल हैं. हेडमास्टर का कहना है कि एक तो शिक्षकों व दूसरे किताबों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है. स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या है, शिक्षकों की कमी. जितने पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, उससे आधे शिक्षक ही स्कूल में कार्यरत हैं. उनके स्कूल में शिक्षकों के 42 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में 20 शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं. 22 पद रिक्त हैं. महानगर के अनुदान प्राप्त स्कूलों के कुछ शिक्षकों का कहना है कि अगर बच्चों से किताबें ले ली जायें और ड्रेस ही दी जायें तो क्या वे पढ़ पायेंगे.
छात्रों को मिड डे मील दे दिया जाये लेकिन पढ़ाने के लिए अगर स्कूल में शिक्षक ही न हों, तो क्या शिक्षा का स्तर बरकरार रह सकता है. इसे बरकरार रखने के लिए शीघ्र पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति व किताबों के वितरण की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए. अभी तो चुनाव व गर्मी के कारण स्कूल में कक्षाएं बंद रखी गयी हैं. खुलने पर राज्य के शिक्षक स्कूलों में व्यवस्था ठीक करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग से अपील करेंगे.

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