बवाल: दो छात्र संगठनों में मारपीट

कोलकाता. यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को एसएफआइ-डीवाईएफआइ व अभाविप के बीच हुई मारपीट के बार पूरा परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. दोनों ओर से इस मारपीट की घटना में दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गये. वाम छात्र संगठन की ओर से दो छात्राओं के साथ दुष्कर्म का आराेप अभाविप पर लगाया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 7, 2016 8:07 AM
कोलकाता. यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को एसएफआइ-डीवाईएफआइ व अभाविप के बीच हुई मारपीट के बार पूरा परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. दोनों ओर से इस मारपीट की घटना में दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गये. वाम छात्र संगठन की ओर से दो छात्राओं के साथ दुष्कर्म का आराेप अभाविप पर लगाया गया है. इसके अलावा आयोजक मंडली के चार सदस्यों को भी उग्र प्रदर्शनकारियों ने बंधक बना लिया है. इस घटना की वजह अनुपम खेर अभिनीत फिल्म बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम की स्क्रीनिंग है जो कि यादवपुर विश्वविद्यालय के त्रिगुणा सेन आडिटोरियम में होनी थी. बाद में वाम छात्र संगठनों के विरोध को देखते हुए प्रबंधन ने अनुमति रद्द कर दी थी.

आज शाम फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचते ही वाम छात्र संगठनों की ओर से उन्हें काले झंडे दिखाए गये व गो बैक जैसे तमाम नारे लगाये गये. यहां तक की उनको उनकी कार से खींच कर बाहर लाने की कोशिश भी की गयी. जिसका अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया. जिसके बाद दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गयी.

वहीं वाम छात्र संगठन की ओर हिंसक प्रदर्शन व पूरे कैंपस में तनाव के बीच ‘बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम’ का प्रदर्शन किया गया. वहीं दूसरी ओर एक और अन्य आडिटोरियम में ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ का प्रदर्शन भी वाम संगठनों की ओर से किया गया. वाम छात्र नेताओं का आरोप है कि बाहरी लोगों ने आकर विश्वविद्यालय में हंगामा किया है. वहीं अभाविप की ओर से लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने की घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया.

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए कुलपति सुरंजन दास भी रात दस बजे के करीब विश्वविद्यालय पहुंच चुके हैं. वे परिसर में बंधक बनाये गये लोगों को छुड़ाने के लिए आंदोलनरत छात्रों से बातचीत करने की तैयारी में हैं. दूसरी ओर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन भी जारी है. स्क्रीनिंग की अनुमति रद्द करने के पीछे चुनाव आचार संहिता का हवाला दिया गया था. जिस पर फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि फिल्म के प्रदर्शन के लिए आचार संहिता नहीं होती. यह फिल्म 13 मई को देश भर में रिलीज होगी. उन्होंने इस विरोध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले की कार्रवाई बताया.

उन्होंने हैरत जतायी कि लोग फिल्म को दिखाने को लेकर भयभीत क्यों हैं. उन्होंने इसे भारत में बनी अब तक की सबसे साहसिक फिल्म करार दिया. अनुपम खेर और अरुणोदय सिंह ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभायी है और इसे देशभर के कई शैक्षणिक संस्थानों में इसे दिखाया जा चुका है.