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सहारा इंडिया परिवार ने दिये सवालों के जवाब

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कोलकाता : सहारा से जुड़ी न्यायायिक प्रक्रिया चल रही है. इस बीच सहाराश्री तथा सहारा के मैनेजिंग वर्कर व चेयरमैन सुब्रत राय आभार यात्रा के तहत कोलकाता पहुंचे. साइंस सिटी ऑडिटोरियम में उन्होंने बड़ी तादाद में मौजूद सहाराकर्मियों को संबोधित किया. पेश है सहारा इंडिया परिवार द्वारा दिये गये जवाब. प्रश्न : सहारा ने नियमों […]

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कोलकाता : सहारा से जुड़ी न्यायायिक प्रक्रिया चल रही है. इस बीच सहाराश्री तथा सहारा के मैनेजिंग वर्कर व चेयरमैन सुब्रत राय आभार यात्रा के तहत कोलकाता पहुंचे. साइंस सिटी ऑडिटोरियम में उन्होंने बड़ी तादाद में मौजूद सहाराकर्मियों को संबोधित किया. पेश है सहारा इंडिया परिवार द्वारा दिये गये जवाब.

प्रश्न : सहारा ने नियमों को तोड़ते हुए फंड क्यों इकट्ठा किया. क्या यही मौजूदा समस्या की जड़ नहीं है?

उत्तर : यह मामला अदालत के विचाराधीन है, लेकिन यह जरूर कहना चाहते हैं कि आरोप पूरी तरह गलत हैं. 2006 में हमने 1.98 करोड़ ओएफसीडी (ऑप्शनली फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) निवेशकों के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, कोलकाता, में रिटर्न फाइल किया. निवेशकों की तादाद 50 से कहीं अधिक थी.

यह उनकी मंजूरी और इजाजत से हुआ. इसके बाद 2008 में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, यूपी और फिर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, महाराष्ट्र से लिखित अनुमति मिली कि सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआइआरइसीएल) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआइसीएल) के लिए ओएफसीडी के जरिये फंड इकट्ठा कर सकती हैं. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत सीधे काम करनेवाला रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज सर्वाधिक महत्वपूर्ण सरकारी विभाग है. हमने अपना बैलेंस शीट और रिटर्न आदि भी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास फाइल किया, जिसके लिए सभी नियमों का पालन किया गया. उन्होंने नियमित तौर पर सहारा की जांच की.

सेबी इस प्रक्रिया का हिस्सा कभी नहीं था. लिहाजा इन ओएफसीडी को, जिन्हें उपयुक्त सरकारी प्रक्रिया के बाद जारी किया गया था, हमने सभी नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया. इस विवाद की शुरुआत में भी देश के तत्कालीन कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीएन खरे, पूर्व सोलिसिटर जनरल मोहन परसरन, पूर्व अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल डॉ अशोक निगम और कई अन्य कानूनविदों ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में सेबी गलत है. हमारी उपरोक्त दोनों कंपनियां सेबी के दायरे में नहीं आतीं. बावजूद इसके सेबी 2010 से ही हमें दंडित करने में लग गया. उसका कहना था कि 50 से अधिक निवेशकों के निवेश को प्राइवेट प्लेसमेंट का दरजा नहीं दिया जा सकता.

कानून में हालांकि ऐसी किसी बंदिश का जिक्र नहीं है. इसके अलावा पूर्व में जब सहारा ने रिटर्न दाखिल किया था, तो न ही किसी अधिकारी या न किसी ऑथोरिटी ने आपत्ति जतायी थी. इसके अलावा 2008 में दो अौर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने ओएफसीडी जारी करने की लिखित अनुमति दी थी. सेबी इन दोनों रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करता. सहारा की वित्तीय परिसेवा न कभी चिटफंड व्यवसाय में थी और न है.

प्रश्न : आप सेबी को और पैसे क्यों नहीं दे देते, ताकि वह निवेशकों चुका सके?

उत्तर : 43 महीनों में सेबी ने केवल 50 करोड़ रुपये निवेशकों को चुकाये हैं. वह भी देश भर में 144 समाचार पत्रों में रिपेमेंट की मांग का आमंत्रण देने के लिए विज्ञापन देने के बाद. सेबी को चार बार ऐसे राष्ट्रव्यापी विज्ञापनों के बाद कुल रिपमेंट की मांग केवल 50 करोड़ रुपये की मिली थी. इसके बाद सेबी के पास और कोई मांग नहीं पहुंचेगी, क्योंकि सेबी ने अपने पिछले विज्ञापन में स्पष्ट कहा था कि रिपेमेंट की मांग करने का यह अंतिम मौका है. लिहाजा सेबी द्वारा कुल रिपेमेंट अब तक केवल 100 करोड़ रुपये के करीब हुआ है.

वहीं अब तक हमने सेबी को 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक मुहैया कराया है, जिसमें एफडी पर हासिल ब्याज शामिल है. साथ ही सेबी के पास सहारा की जमीन की संपत्ति के मूल कागजात हैं, जिसका मूल्य 20 हजार करोड़ रुपये है. यह भी आप मानेंगे कि यदि अपने तीन करोड़ निवेशकों को हमने रिपमेंट न दिया होता, तो अब तक भारी हिंसा और आत्महत्या की वारदात देखी जाती. इन सबसे नतीजा निकाला जा सकता है कि हमारे निवेशक असली हैं और हमने जमा की गयी राशि को लौटा दिया है. हालांकि सेबी अब कहता है कि कोई लेनदार सामने नहीं आ रहा. सभी खाते फरजी हैं. दूसरी और सहारा ने हमेशा कहा है कि एक भी खाता फरजी नहीं है. साहारा के दावे की शक्ति इस बात से भी स्पष्ट होती है कि सेबी निवेशक जांच प्रक्रिया को टाल रहा है, क्योंकि वह जानता है कि जांच में सहारा सही साबित होगी. सेबी के लिए यह भारी शर्म की बात होगी. इसके बाद सभी पैसा वापस सहारा में आ जायेगा.

प्रश्न : आप कैसे कह सकते हैं कि सहाराश्री सुब्रत राय की इन दोनों की कंपनियों में भूमिका गिरफ्तारी के काबिल नहीं है?

उत्तर : न्याय व्यवस्था में पूर्व विश्वास जताते हुए यह कहना चाहते हैं कि कानून विशेषज्ञों के अनुसार सहाराश्री न तो निदेशक थे और न ही इन दोनों कंपनियों में किसी कार्यकारी अधिकारी की उनकी भूमिका थी. वह केवल एक शेयरधारक हैं. उन्हें बतौर प्रमोटर शेयरधारक हिरासत में लिया गया. कंपनी एक्ट या अन्य किसी नियम के मुताबिक कोई शेयरधारक कंपनी की किसी गलती के कारण गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

प्रश्न : सहारा वेतन आदि क्यों नहीं दे रही?

उत्तर : 30 महीनों में समूचा सहारा ग्रुप इमबार्गो (व्यापार प्रतिबंध) के तहत है. इस बीच यदि हम अपनी किसी संपत्ति को बेचते हैं या फंड इकट्ठा करते हैं, तो समूचा पैसा सेबी-सहारा खाते में चला जायेगा. इसलिए ग्रुप के लिए एक रुपये भी हम इकट्ठा नहीं कर सकते. यह बेहद मुश्किल घड़ी है. हमारे हाथ-पांव बांध कर पूछा जा रहा है कि हम चल क्यों नहीं रहे.

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