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शर्तों के साथ छठ पूजा मनाना मंजूर नहीं

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कोलकाता. छठ पूजा पर ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले ने पश्चिम बंगाल के हिंदी भाषी समाज के बीच बेचैनी उत्पन्न कर दी है. हालांकि राज्य सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए पर्यावरण अदालत ने छठ पूजा करने की छूट तो दे दी है, पर इसके […]

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कोलकाता. छठ पूजा पर ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले ने पश्चिम बंगाल के हिंदी भाषी समाज के बीच बेचैनी उत्पन्न कर दी है. हालांकि राज्य सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए पर्यावरण अदालत ने छठ पूजा करने की छूट तो दे दी है, पर इसके लिए 15 शर्तें लाद दी हैं.

अदालत के इस फैसले पर सामाजिक संगठन राष्ट्रीय बिहारी समाज ने गहरा विरोध जताया है. संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि शर्तों के साथ छठ पूजा मनाना हमें मंजूर नहीं है. संगठन के अध्यक्ष मणि प्रसाद सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अदालत को भ्रमित करने का काम किया गया है. कानून के अनुसार मामले में उस पक्ष को भी एक पार्टी बनाना होता है, जिसका मामले से किसी ने किसी तरह का संबंध हो, पर इस मामले में ऐसा नहीं किया गया. अदालत को यह नहीं बताया कि अन्य पूजा और छठ पूजा में जमीन व आसमान का फर्क है. छठ पूजा में नदी व जलाशयों में कोई भी चीज विसर्जित नहीं की जाती है.

श्री सिंह ने आरोप लगाया कि मामला करनेवाले पर्यावरणविद सुभाष दत्ता ने हकीकत में इस मामले के द्वारा हिंदी भाषियों को राज्य सरकार से लड़ाने की एक साजिश रची थी, पर उनकी यह साजिश नाकाम हो गयी. राज्य सरकार ने जिस तरह से इस मामले में हमारा साथ दिया है, उसके लिए यह सरकार धन्यवाद की पात्र है.
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव राजेश सिन्हा ने कहा कि ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले का हम लोग सामाजिक स्तर पर विरोध तो कर ही रहे थे, अब कानूनी रास्ता भी अपनायेंगे. श्री सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार की अपील पर मामले में स्टे तो मिल गया है, पर हम लोग यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम लोग छठ पूजा किसी शर्त के साथ नहीं मनायेंगे. यह आस्था का मामला है. कल को अगर कोई मामला कर दे तो क्या नदियों व जलाशयों में नहाने पर भी पाबंदी लगा दी जायेगी. उन्होंने कहा कि सुभाष दत्ता ने इस बार जो छेड़खानी की है, वह विस्फोटक हो सकती है, क्योंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है. हम लोग न्यायालय का सम्मान करते हैं. ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस फैसले के खिलाफ हम लोग ऊंची अदालत में अपील करेंगे. श्री सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छठ पूजा के अवसर पर पूर्ण अवकाश की घोषणा कर अपना एक वादा पूरा किया है, जिसके लिए हम सब उन्हें धन्यवाद देते हैं. यह धर्म का मामला है. इसमें हस्तक्षेप हमें स्वीकार नहीं है. हमारा अनुरोध है कि राष्ट्रीय बिहारी समाज को भी इस मामले में एक पार्टी बनाया जाये ताकि अदालत को छठ पूजा के बारे में सही जानकारी दी जा सके.
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिथिला विकास परिषद के अशोक झा ने कहा कि छठ पूजा पर किसी भी प्रकार की शर्त हमें मंजूर नहीं है. इस फैसले के खिलाफ शर्तों की प्रतियां जला कर अपना विरोध जतायेंगे.
अखिल भारतीय क्षत्रीय समाज के मुख्य संरक्षक जयप्रकाश सिंह ने कहा कि हमारे लिए धर्म व आस्था से बढ़ कर कुछ भी नहीं है. ग्रीन ट्रिब्यूनल का यह फैसला सीधे हमारे धर्म व आस्था पर आघात है, जिसका हम सबको मिल कर विरोध करना होगा.
राष्ट्रीय एकता मंच के चेयरमैन रणधीर सिंह ने कहा कि छठ पूजा को राजनीति से प्रेरित मुद्दा बनाने से बचना चाहिए. मौके पर हिंदी व बांग्ला भाषा युवा मंच के अध्यक्ष व भाजपा नेता नवीन मिश्रा, मगही मगध नागरिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पारस सिंह, क्षत्रीय समाज कोलकाता के रामायण सिंह, श्याम कन्हैया सिंह, शंकर बक्स सिंह, आरपी सिंह, जुगल किशोर झा इत्यादि भी उपस्थित थे.

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