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महज 635 रुपये के लिए हुई अंतिम संस्कार में परेशानी

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मालदा. बड़े नोट बंद करने के सरकारी निर्णय से मृतक का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट आये लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मालदा के श्मशान घाट में खुदरा पैसे ंकी कमी से कई शवों का शवदाह रोक दिया गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मालदा के श्मशानघाट में बिजली के चूल्हे […]

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मालदा. बड़े नोट बंद करने के सरकारी निर्णय से मृतक का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट आये लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मालदा के श्मशान घाट में खुदरा पैसे ंकी कमी से कई शवों का शवदाह रोक दिया गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मालदा के श्मशानघाट में बिजली के चूल्हे में शवदाह होता है. इसके लिए मृतक के परिजन को 635 रुपये जमा करने होते हैं. खुदरा नहीं होने की वजह से इंगलिश बाजार ब्लॉक के सादुल्लापुर श्मशान घाट में शवों की लंबी लाइन लग गई.

मालदा जिला परिषद के अधीन इस श्मशान घाट के कर्मचारियों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने 500 तथा 1000 रुपये का नोट रद्द कर दिया है. सरकार ने अपने फैसले में 72 घंटे तक सरकारी अस्पतालों तथा पेट्रोल पंपों पर 1000 तथा 500 रुपये के नोट लेने की बात कही है, लेकिन श्मशान घाटों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. इसी वजह से वह लोग मृतक के परिजनों को खुदरा पैसा लाने के लिए कह रहे हैं. जो लोग खुदरा पैसा दे रहे हैं, उन्हीं के मृतक रिश्तेदार का अंतिम संस्कार हो रहा है. जो लोग खुदरा पैसा नहीं देंगे उसमें वह कोई मदद नहीं कर पायेंगे. शवदाह करने आये सुजय मंडल का कहना है कि उनके पास 500 रुपये का दो नोट है. वह दोनों नोटों को लेकर 635 रुपये जमा कराने गये थे. काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने खुदरा लाने के लिए कहा. वह खुदरा लाने के लिए श्मशान घाट के आसपास के दुकानों में भी गये. कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली. शवदाह के इंतजार में चार घंटे से बैठे हुए हैं. समझ में नहीं आ रहा है कि 635 रुपये कहां से लाये. हबीबपुर थाना के नीमतला गांव के रहने वाले बासुदेव हालदार (77) तथा गाजोल थाना के काजल मांझी (68) के शव का भी अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है. दोनों ही मृतक के परिवार खुदरा नोट जुगाड़ करने में लगे हुए थे. इन लोगों ने केन्द्र सरकार के अचानक लिये गये इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है. एक मृतक के परिवार खुदरा पैसा लाने के लिए फिर से गांव गये हैं. उनके साथ शवदाह के लिए आने वाले लोगों का कहना है कि सादुल्लापुर श्मशान घाट से उनके गांव की दूरी करीब 70 किलोमीटर है. गांव जाकर खुदरा पैसा लाने में काफी समय लग जायेगा. लगता है अब कल ही शव का अंतिम संस्कार हो सकेगा.

जिला प्रशासन ने शुरू की पहल
खुदरा पैसा नहीं होने की वजह से शवों का अंतिम संस्कार रूक जाने की वजह से ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है. मालदा जिला परिषद के अतिरिक्त सीईओ मलय बनर्जी ने कहा है कि शवों का अंतिम संस्कार नहीं होना काफी दुखद है. उन्होंने विभागीय अधिकारियों को मुआयना करने के लिए मौके पर भेजा है.

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