राज्य सरकार उत्सव, फिल्म और मेला में पैसे खर्च कर रही है, लेकिन कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है. इससे कर्मचारियों में असंतोष है. उसी असंतोष के मद्देनजर स्थगन प्रस्ताव लाया गया था. आरएसपी के विधायक विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि विरोधी दल के नेताओं को विधानसभा में बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि विधानसभा विरोधी दल का होता है, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गयी. यह बहुत ही निंदनीय है. संसदीय मंत्री पार्थ चटर्जी ने विपक्ष के आरोप पर कहा कि विपक्ष ने पहले ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जमा दिया था.
अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बकाया महंगाई भत्ता सहित विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया था. ऐसी स्थिति में एक ही मुद्दे को विधानसभा में बार-बार उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. वास्तव में विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर ही बड़ी गलती की थी. उसके बाद से वह किसी भी मुद्दे पर सरकार से बहस की मांग नहीं कर सकते हैं.