कर्मचारियों के बकाया डीए की मांग पर वामो-कांग्रेस का वाकआउट

कोलकाता. राज्य सरकार के कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता देने की मांग को लेकर कांग्रेस व वाम मोरचा के विधायकों ने विधानसभा की कार्यवाही से वाकआउट किया. बुधवार को कांग्रेस व वाम मोरचा ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार के कर्मचारियों को बकाया डीए देने की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव जमा दिया, लेकिन विधानसभा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 15, 2016 8:17 AM
कोलकाता. राज्य सरकार के कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता देने की मांग को लेकर कांग्रेस व वाम मोरचा के विधायकों ने विधानसभा की कार्यवाही से वाकआउट किया. बुधवार को कांग्रेस व वाम मोरचा ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार के कर्मचारियों को बकाया डीए देने की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव जमा दिया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव को पढ़ने की अनुमति नहीं दी. इससे क्षुब्ध वामो व कांग्रेस के विधायकों ने शोरगुल मचाना शुरू कर दिया और उसके बाद विधानसभा की कार्यवाही से वाकआउट कर गये.
बाद में संवाददाता सम्मेलन में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के अलोकतांत्रिक रवैये के खिलाफ उन लोगों ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का निर्णय किया. विधानसभा अध्यक्ष कम से कम उन लोगों के स्थगन प्रस्ताव की प्रति को पढ़ने की अनुमति देते, लेकिन अध्यक्ष ने इसकी भी अनुमति नहीं दी. केंद्र सरकार व राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते के बीच अंतर 56 फीसदी हो गया है.

राज्य सरकार उत्सव, फिल्म और मेला में पैसे खर्च कर रही है, लेकिन कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है. इससे कर्मचारियों में असंतोष है. उसी असंतोष के मद्देनजर स्थगन प्रस्ताव लाया गया था. आरएसपी के विधायक विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि विरोधी दल के नेताओं को विधानसभा में बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि विधानसभा विरोधी दल का होता है, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गयी. यह बहुत ही निंदनीय है. संसदीय मंत्री पार्थ चटर्जी ने विपक्ष के आरोप पर कहा कि विपक्ष ने पहले ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जमा दिया था.

अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बकाया महंगाई भत्ता सहित विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया था. ऐसी स्थिति में एक ही मुद्दे को विधानसभा में बार-बार उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. वास्तव में विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर ही बड़ी गलती की थी. उसके बाद से वह किसी भी मुद्दे पर सरकार से बहस की मांग नहीं कर सकते हैं.