नयी दिल्ली: बाइक एंबुलेंस चला मानवता की सेवा करने वाले जलपाईगुड़ी जिले के माल ब्लॉक के राजाडांगा के चाय श्रमिक करीमुल हक को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जायेगा. उन्हें सामाजिक कार्य के लिए पद्मश्री सम्मान पुरस्कार के लिए चुना गया है. योग के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए बिहार के निरंजनानंद सरस्वती को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा जायेगा. इसके अलावा पेंटिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए बिहार की बोवा देवी, संगीत के क्षेत्र में झारखंड के मुकुंद नायक और साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने के लिए बलवीर दत्त को पद्म श्री सम्मान देने की घोषणा की गयी है.
भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवंगत सुंदरलाल पटवा और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा को सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के लिए और संगीत के लिए के येसुदास, धार्मिक गुरु जग्गी वासुदेव, विज्ञान के क्षेत्र में यूआर राव को पद्म विभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है. इस साल पद्म पुरस्कारों के लिए 89 नामों को मंजूरी दी गयी है, जिसमें पद्म विभूषण के लिए सात, पद्म भूषण के लिए सात और पद्म श्री के लिए 75 नामों की घोषणा की गयी है.
मालूम हो कि पद्म सम्मान की तीन श्रेणियां होती हैं- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री. कला, संगीत, सामाजिक कार्य, साइंस एवं इंजीनियरिंग, उद्योग एवं व्यापार, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, नागरिक प्रशासन, विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान देनेवालों को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है. ये पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा मार्च-अप्रैल महीने में राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले समारोह में दिये जाते हैं, लेकिन नामों की घोषणा गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है.
मां को मौके पर नहीं मिली थी एंबुलेंस
जलपाईगुड़ी: अपनी मां को एंबुलेंस के अभाव में बचा नहीं पाये. लेकिन कोई और मां चिकित्सा के अभाव में नहीं मरे, यह संकल्प लेकर जलपाईगुड़ी जिले के माल ब्लॉक के राजाडांगा के चाय श्रमिक करीमुल हक मानवता की सेवा में उतर गये. उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को एंबुलेंस बना लिया और नि:स्वार्थ भाव से खुद को बीमारों की सेवा में लगा दिया. अब उन्हें इसका जो फल मिला है, वह पूरे जिले और राज्य को गौरवान्वित करनेवाला है. केंद्र सरकार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने जा रही है. बुधवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने करीमुल हक का नाम पद्मश्री के लिए घोषित किया.
करीमुल हक के परिवार में उनकी पत्नी आंजुवा बेगम, दो बेटे राजेश व राजू और पुत्रवधुएं हैं. वह सुबर्नपुर नामक एक स्थानीय छोटे बागान में 4 हजार रुपये में मजदूर का काम करते हैं. दो बेटे पान और मोबाइल रीचार्ज की दुकान चलाते हैं. करीमुल अपनी आमदनी बाइक एंबुलेंस के ईंधन पर खर्च करते हैं. 1995 में उनकी मां जाफुरान्निशा की मौत हृदय रोग से हुई थी.
तब करीमुल हॉकर का काम करते थे. उनके पास अपनी बाइक भी नहीं थी. वह एंबुलेंस या अन्य गाड़ी के अभाव में मां को अस्पताल नहीं ले जा सके और उनकी घर में ही मौत हो गयी. इसके बाद उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया. चाय बागान में नौकरी पकड़ी, बाइक खरीदी और उसे एंबुलेंस में बदल दिया. 1998 से ही वह राजाडांगा, धोलाबाड़ी, क्रांति, चेंगमारी इलाके के लोगों की सेवा कर रहे हैं.
बुधवार को दिल्ली से फोन आया और हिंदी व अंगरेजी में उन्हें पद्मश्री के लिए चुने जाने की खबर दी गयी. करीमुल ने कहा, यह पुरस्कार क्या होता है, मैं नहीं जानता. यदि उनके काम के लिए यह सम्मान दिया गया है, तो यह पुरस्कार अपनी मां को समर्पित करेंगे. करीमुल ने उन सभी लोगों का आभार जताया, जो उनकी एंबुलेंस सेवा में सहायता करते हैं. करीमुल ने कहा, पुरस्कार बड़ी चीज नहीं है. मेरे लिए सेवा ही मुख्य धर्म है.