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एनसीडब्ल्यू के दौरे की तृणमूल ने की आलोचना

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुर्शिदाबाद में हिंसा प्रभावित लोगों से शनिवार को मुलाकात की.

कोलकाता. राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुर्शिदाबाद में हिंसा प्रभावित लोगों से शनिवार को मुलाकात की. इस दौरे के दौरान एनसीडब्ल्यू की टीम द्वारा आश्वासन दिया गया कि भविष्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र हर आवश्यक कदम उठाएगा. हालांकि, उनके इस दौरे की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आलोचना करते हुए एनसीडब्ल्यू की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन पर भाजपा की राजनीतिक शाखा के रूप में काम करने का आरोप लगाया. तृणमूल के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने कहा “एनसीडब्ल्यू सदस्य अर्चना मजूमदार ‘भाजपा कार्यकर्ता’ हैं, जिन्होंने 2021 के बंगाल चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गयीं. भाजपा की प्रचार एजेंसी आपको यह नहीं बतायेगी कि एनसीडब्ल्यू सदस्य अर्चना मजूमदार ने 2021 के बंगाल चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गयीं थीं. वह भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता हैं.’’ उनका आरोप है कि ‘‘एनसीडब्ल्यू लंबे समय से भाजपा की राजनीतिक शाखा रही है और वे इसे छिपाने में भी कुशल नहीं है,’’ तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने राज्य में एनसीडब्ल्यू की पिछली यात्राओं, विशेषकर संदेशखाली की यात्राओं से तुलना करते हुए दावा किया कि उन्होंने गलत सूचना फैलाने का चिर परिचित तरीका अपनाया. उन्होंने यह भी कहा कि “पिछले वर्ष संदेशखाली के निवासियों ने इस बात पर चिंता जतायी थी कि किस प्रकार आयोग और भाजपा की स्थानीय इकाई ने कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराये, जिनका बाद में कथित फर्जी दुष्कर्म की शिकायतें दर्ज कराने में इस्तेमाल किया गया. वे (एनसीडब्ल्यू) बंगाल के अलावा अन्य राज्यों में क्यों नहीं जा रही हैं? मणिपुर, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार होने पर वे कहां जाती हैं? वे यहां राजनीतिक कार्य पर आयी हैं और भाजपा के समर्थकों के साथ घूम रही हैं .उनके अपने हित दांव पर लगे हैं.’’ तृणमूल नेता देवांशु भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘भाजपा के पास बंगाल में एक निश्चित संख्या में केंद्रीय टीम भेजने का वार्षिक कोटा है, जैसा उन्होंने चुनाव बाद की हिंसा और संदेशखाली व अन्य मामलों में किया था. इन केंद्रीय टीम और सीबीआइ-एनआइए जांच के नतीजे के बारे में कोई नहीं जानता.’’ वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज, सुती, धुलियान और जंगीपुर सहित अन्य इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी. इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गयी थी और कई अन्य घायल हुए थे.

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