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कॉलेज व यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के दर्जे में समानता लाने की कोशिश

कोलकाता. राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नीतियों में बदलाव करते हुए शिक्षकों के दर्जे को ऊंचा उठाने की कोशिश की है. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक विशेष अधिसूचना में इस बात का खुलासा किया गया है कि सभी सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों का दर्जा वैसा ही रहेगा, जैसे […]

कोलकाता. राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नीतियों में बदलाव करते हुए शिक्षकों के दर्जे को ऊंचा उठाने की कोशिश की है. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक विशेष अधिसूचना में इस बात का खुलासा किया गया है कि सभी सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों का दर्जा वैसा ही रहेगा, जैसे विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों का रहता है.

इसमें आय व अन्य सुविधाओं के मामले में भी समानता बरतने की रणनीति बनायी जा रही है. इस विषय में दक्षिण कोलकाता के एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि सभी शिक्षकों को समान भाव से व समानता से देखा जाना चाहिए, इससे शिक्षा के क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा. कई बार देखा गया है कि एक सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेज के प्रिंसिपल व एक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का वेतन समान ही होता है. इस मामले में कई शिक्षकों ने सुविधाएं बढ़ाने की सरकार से मांग की थी.

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को जारी एक अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्णकालिक नियमित प्रिंसिपल व प्रोफेसरों के दर्जे में समानता बनी रहेगी. पूर्णकालिक प्रिंसिपल व स्थायी शिक्षक के रूप में कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर अथवा प्रोफेसर कार्यरत हैं. वे सभी व्यक्तिगत ताैर पर पीएचडी व एमफिल स्कॉलर्स का निरीक्षण कर सकते हैं. अभी वर्तमान समय में केवल यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को ही व्यक्तिगत ताैर पर रिसर्च स्कॉलर्स का निरीक्षण करने की छूट थी. अब कॉलेज शिक्षक भी रिसर्च निरीक्षक के रूप में निरीक्षक अथवा सह-गाइड बन कर सहयोग कर सकते हैं. इसका निर्णय यूजीसी द्वारा जारी नियमानुसार लिया गया है. विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यूजीसी के 4 संशोधित नियमों में भी इस बात का खुलासा किया गया है.

सरकारी मान्यता प्राप्त कॉलेजों में पूर्णकालिक नियमित प्रिंसिपल को प्रोफेसर के दर्जे के बराबर ही समझा जायेगा. सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल भी वही एकेडमिक ग्रेड के हिसाब से वेतन लेते हैं. अब इसमें कुछ संशोधन किया जा रहा है. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर समान रूप से एमफिल व पीएचडी छात्रों के लिए व्यक्तिगत रिसर्च निरीक्षक के रूप में काम कर सकते हैं. सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेजों के नियमित पूर्णकालिक शिक्षक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व सहायक प्रोफेसर के रूप में समान रूप से निरीक्षक का काम कर सकते हैं.

इस नयी पहल का सभी प्रिंसिपलों ने स्वागत किया है. यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर व कॉलेज के एक प्रिंसिपल का वेतन समान है. एक सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेज के प्रिंसिपल की तनख्वाह लगभग लगभग 46-47 हजार रुपये है. दोनों की राशि लगभग समान है. प्रिंसिपल के पद के लिए, शिक्षक का पीएचडी होना व अध्यापन में 15 साल का अनुभव होना अनिवार्य है. वहीं यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर बनने के लिए शिक्षक का पीएचडी के साथ 10 साल का अनुभव होना अनिवार्य है. अब शिक्षकों का दर्जा बढ़ाये जाने के लिए सरकार नयी योजना बना रही है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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