केलाबाड़ी में स्क्वॉड की स्थायी तैनाती की मांग

नागराकाटा. रिहाइशी इलाकों में हाथियों के बढ़ते हमले को देखते हुए बुधवार को केरन बीट ऑफिस में वाइल्ड लाइफ के एडीएफओ ने अपर केलाबाड़ी बस्ती के किसानों के साथ एक बैठक की. इस बस्ती में साल भर हाथियों का तांडव चलता रहता है. इलाके में हाथी अभी तक धान की करीब तीन चौथाई फसल नष्ट […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 12, 2017 9:05 AM

नागराकाटा. रिहाइशी इलाकों में हाथियों के बढ़ते हमले को देखते हुए बुधवार को केरन बीट ऑफिस में वाइल्ड लाइफ के एडीएफओ ने अपर केलाबाड़ी बस्ती के किसानों के साथ एक बैठक की. इस बस्ती में साल भर हाथियों का तांडव चलता रहता है. इलाके में हाथी अभी तक धान की करीब तीन चौथाई फसल नष्ट कर चुके हैं. बची-खुची फसल को हाथियों से कैसे बचाया जाये, इस पर विचार किया गया.

बैठक के दौरान किसानों ने केलाबाड़ी में स्थायी वाइल्ड लाइफ स्क्वॉड की तैनाती की मांग की. अभी यह स्कवार्ड बिन्नागुड़ी में है. जब तक वहां से कोई मदद मिलती है, तब तक हाथी अपना काम कर चुके होते हैं. किसानों ने कहा कि खेती ही हमारी रोजी-रोटी है. हाथियों के चलते इस पर संकट पैदा हो गया है. हमलोग मक्का की खेती पहले ही छोड़ चुके हैं.

अब धान पर भी आफत है. कुछ दिन पहले ही इलाके में 500 बीघा से ज्यादा तैयार धान हाथियों ने नष्ट कर दिया. डायना रेंज के रेंजर शुभाशीष चटर्जी ने बताया कि डायना जंगल हाथियों को काफी पसंद आता है, क्योंकि जंगल के आसपास के इलाके में धान के काफी खेत हैं. पूरे साल इस जंगल में 80 से ज्यादा हाथी जमे रहते हैं. इस जंगल में हाथियों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं है, इसलिए वह जंगल से निकलकर रिहाइशी इलाके में घुसते हैं. इस समस्या पर नियंत्रण के लिए वन विभाग और ग्रामीणों को मिलकर काम करना होगा.


एडीएफओ ने कहा कि हाथी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच कर फसलों को नष्ट करते हैं. इस समस्या के मद्देनजर हमलोगों ने किसानों के साथ बैठक कर हाथियों के हमले कम करने के उपायों पर चर्चा की है. बैठक में शामिल एक किसान भक्त छेत्री ने बताया कि वन विभाग से हर संभव मदद का आश्वासन मिला है.