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रोजगार के लिए जिंदगी दांव पर लगा रहे चाय श्रमिक

कालियागंज: अच्छे रोजगार की उम्मीद में पश्चिम बंगाल, असम, यहां तक कि बांग्लादेश से श्रमिक भूटान जाते है. जहां मकान, सड़क, पुल व पनबिजली योजनाओं के निर्माण कार्य में उन्हें काम तो मिल जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती है. इन कामों में हर पल जीवन का खतरा लगा रहता है. […]

कालियागंज: अच्छे रोजगार की उम्मीद में पश्चिम बंगाल, असम, यहां तक कि बांग्लादेश से श्रमिक भूटान जाते है. जहां मकान, सड़क, पुल व पनबिजली योजनाओं के निर्माण कार्य में उन्हें काम तो मिल जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती है. इन कामों में हर पल जीवन का खतरा लगा रहता है. कई श्रमिक घायल होते हैं तो कई विकलांग, यहां तक कि कई श्रमिकों की मौत तक हो जाती है. लेकिन कंस्ट्रक्शन कंपनियां निर्माण श्रमिकों की इस दुर्दशा को न तो स्वीकार करती हैं और न ही श्रमिकों को किसी प्रकार की सुरक्षा मुहैया करवाते हैं. हादसा होने पर उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता है.

आंकड़े बताते हैं कि 2016-17 साल में 26 जानलेवा दुर्घटनाएं हुईं. इन दुर्घटनाओं में नौ लोग आंशिक रूप से विकलांग हुए है. भूटान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2015-16 में भूटान के विभिन्न प्रांतों में काम करते हुए कुल 33 हजार लोग दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं. पिछले सप्ताह भूटान की राजधानी थिम्पू में आयोजित ‘अकुपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी’ विषयक सेमिनार में यह आंकड़ा सामने रखा गया. यह सेमिनार निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के मुद्दे पर जोर देने के लिए आयोजित किया गया था.
भूटान के श्रम अधिकारी सोनम ताशी ने कहा कि श्रमिकों से अनुरोध किया जा रहा है कि काम के दौरान होनेवाली हर दुर्घटना से उन्हें अवगत कराया जाये, ताकि श्रमिकों को उचित मुआवजा मिल सके. उन्होंने कहा कि पनबिजली केंद्र में निर्माण कार्य सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. लेकिन दुर्घटना के बाद कंपनियां श्रमिक को थोड़े-बहुत पैसे देकर बात को दबा देती हैं. काम के दौरान श्रमिक सेफ्टी बेल्ट, सेफ्टी जैकेट, हेलमेट आदि सुरक्षा सामानों का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

घातक केमिकल से काम करने के कारण 2016 साल में 10572 श्रमिकों को आर्थराइटिस की बीमारी हो गयी है. 98000 श्रमिकों को मांसपेशी संबंधित बीमारी हुई है. इस संबंध में डुआर्स के श्रमिकों का कहना है कि एक के बाद एक चाय बागान बंद हो रहे है. बाध्य होकर चाय श्रमिकों को इस तरह के खतरनाक पेशे से जुड़ना पड़ता है. उत्तर बंगाल में निर्माण श्रमिकों को काफी कम मजदूरी दी जाती है. भूटान में पैसा ज्यादा मिलता है.
भूटान में गंभीर बीमारियों व हादसों का हो रहे शिकार
निर्माण कार्य के दौरान दुर्घटना ही नहीं, श्रमिकों को चर्म रोग, हड्डी रोग, नजर कमजोर पड़ना यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी हो जाती है. भूटान सरकार के पब्लिक हेल्थ इंजीनियर करमा वांगरी ने बताया कि विभिन्न कारखाना या निर्माण संस्था के श्रमिक बिना सावधानी के शीशा, पारा, एसबेस्टस सहित विभिन्न घातक रसायनों के साथ काम करते है. इससे उन्हें कई खतरनाक बीमारियां हो जाती हैं.
Prabhat Khabar Digital Desk
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