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पहाड़ में लोकतंत्र का गला घोंट रही है राज्य सरकार : विमल

दार्जिलिंग : राज्य सरकार ने तीसरी बार जीटीए की मियाद बढ़ाकर प्रजातंत्र का गला दबाने का कार्य किया है. उक्त आरोप गोजमुमो के भूमिगत नेता विमल गुरूंग ने लगाया है. गुरुवार को गोजमुमो नेता विमल गुरूंग ने एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा है कि जीटीए का दूसरा चरण का कार्य सीमा समाप्त हो गया […]

दार्जिलिंग : राज्य सरकार ने तीसरी बार जीटीए की मियाद बढ़ाकर प्रजातंत्र का गला दबाने का कार्य किया है. उक्त आरोप गोजमुमो के भूमिगत नेता विमल गुरूंग ने लगाया है. गुरुवार को गोजमुमो नेता विमल गुरूंग ने एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा है कि जीटीए का दूसरा चरण का कार्य सीमा समाप्त हो गया है. लेकिन फिर भी राज्य सरकार ने अस्तित्वविहीन हो चुके जीटीए को 19 सितम्बर को ही अधिसूचना जारी करके कार्यकाल 6 माह के लिये बढ़ाने जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रही है.
राज्य सरकार के इस तरह के निर्णय से पहाड़ में प्रजातंत्र का गला दबाने का कार्य के साथ-साथ जनता के मतदान करने का संवैधानिक अधिकार को कुचल दिया है. राज्य सरकार पहाड़बासियों पर दमननीति चलाने का कार्य पहले से करती आ रही थी. जारी विज्ञाप्ति में गुरूंग ने सुमेटी मुक्ति मोर्चा के बयान की भी कठोर शब्दों में विरोध किया है.
सुमेटी मुक्ति मोर्चा ने गोर्खालैंड के नाम पर बंगाल से अलग होने को असंभव बताया है. गुरूंग ने सुमेटी मुक्ति मोर्चा के इस तरह बयान पर घोर आपत्ति जताते हुये गोर्खाओं के गोर्खालैंड की मांग को बर्बाद करने के बड़े साजिश की संज्ञा दी है. परंतु इस तरह की साजीश सफल नहीं होगी. सुमेटी मुक्ति मोर्चा ने विमल गुरूंग को पहाड़ का जनप्रतिनिधि नहीं होने की जो बातें कही है, उसपर विमल ने आपत्ति जताया. केन्द्र सरकार ने त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने पर पहाड़ के सभी राजनैतिक दलों को आमंत्रित करने की मांग भी की है.
परंतु इस तरह का मांग हास्यास्पद है. जीटीए के त्रिपक्षीय समझौते में गोर्खालैंड की मांग को ड्रॉप नहीं किया गया और उक्त दस्तावेज पर हस्ताक्षर रोशन गिरी ने किया है. दूसरी बात गोर्खालैंड की मांग को लेकर आज भी हमलोग अडिग हैं और आंदोलनरत हैं. इसलिये वार्ता आन्दोलनकारियों के साथ होगा और आंदोलन को बिक्री करने और राजनीतिक दुकान रखने वालों के साथ नहीं.
जीटीए कानून को अकेले नहीं बदल सकती सरकार
प्रेस विज्ञाप्ति में विमल ने कहा है कि जीटीए समझौता में राज्य सरकार, केन्द्र सरकार और गोजमुमो के बीच जो समझौता हुआ था, जिसमें विभिन्न प्रकार के शर्तों को भी शामिल किया गया है. परंतु राज्य सरकार ने उन शर्तों का उलंघन किया है. तीन बार जीटीए की कार्य सीमा बढ़ाने को गैरकानूनी बताने का एक्ट में कोई उल्लेख नहीं होने की बातें विनय तमांग ने कही थी.
लेकिन विनय तमांग के इस प्रश्न के जवाब में कहना चाहता हूं कि चुनाव के बगैर कोई भी राजनीतिक दल का व्यक्ति प्रशासनिक कुर्सी पर बैठा हुआ हो, तो वो बता दें. इस तरह का कानून देश के कौन से किताब में उल्लेखित है. उन्होंने यह भी कहा मैंने मीडिया रिपोर्ट में एक बयान को देखा है, जिसमें विधानसभा में संशोधन करके जीटीए की कार्य सीमा बढ़ाने की बात कही गयी है.
लेकिन राज्य सरकार यह नहीं कर सकती है. क्योंकि त्रिपक्षीय समझौता द्वारा बनाये गये जीटीए कानून को राज्य सरकार अकेले नहीं बदल सकती. यदि बदल गया तो वह जीटीए एक्ट गैरकानूनी होगा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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