पार्टी की मजबूती के लिए मन घीसिंग ने की बैठक, गोरामुमो ने किया संचालन समिति का गठन – कहा, पहाड़ की जनता जीटीए को कर चुकी है खारिज

दार्जिलिंग : पहाड़ में गोरामुमो ने संगठन विस्तार के लिये कार्य योजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इसके तहत बुद्धवार को पार्टी ने एक संचालन समिति का गठन किया है. विगत कुछ माह पहले गोरामुमो ने संगठन में धार देने के उद्देश्य से केंद्रीय कमेटी का विघटन कर दिया था. अब संगठन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 29, 2018 6:39 AM
दार्जिलिंग : पहाड़ में गोरामुमो ने संगठन विस्तार के लिये कार्य योजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इसके तहत बुद्धवार को पार्टी ने एक संचालन समिति का गठन किया है. विगत कुछ माह पहले गोरामुमो ने संगठन में धार देने के उद्देश्य से केंद्रीय कमेटी का विघटन कर दिया था. अब संगठन को मजबूत बनाने के लिये संचालन कमेटी का गठन किया गया है.
शहर के डॉ. जाकिर हुसैन रोड स्थित गोरामुमो केंद्रीय कार्यालय में पार्टी अध्यक्ष मन घीसिंग ने पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि संगठन के नये तरीके से संचालन करने के लिये ही संचालन समिति का गठन किया गया है. नवगठित संचालन समिति में पार्टी अध्यक्ष मन घीसिंग, केशव लामा.
भीम सुब्बा, एनबी छेत्री, महेंद्र छेत्री, पारस गुरुंग, वीएम लामा, भक्त जैरू, पीसी अग्रवाल, वीके राई, नीरज जिम्बा, अजय एडवर्ड, किशोर गुरुंग, एमजी सुब्बा, मौरिस कालीकोटे, नीमा लामा, चड़ामणि खडका शामिल हैं. श्री घीसिंग ने कहा कि नवगठित संचालन समिति अब संगठन को मजबूत बनाने, केंद्रीय कमेटी का गठन करने और आगामी लोकसभा चुनाव के मुद्दे पर चर्चा की गयी. उन्होंने आगामी रविवार को स्थानीय पार्टी कार्यालय में नवगठित संचालन समिति के बैठक आयोजित होने का संकेत दिया.
एक प्रश्न के जवाब में अध्यक्ष श्री घीसिंग ने कहा कि पहाड़ की जनता जीटीए को खारिज कर चुकी है. पिछले साल हुये आंदोलन के दौरान आज जीटीए की कुर्सी पर बैठने वाले नेताओं ने जीटीए का दस्तावेज जलाकर जीटीए को खारिज किया था और कहा था कि जीटीए असंवैधानिक व्यवस्था है. आज जिनलोगों के द्वारा जीटीए के 45 सीटों पर जीत हासिल करने का दावा किया जा रहा है, वही लोग संवैधानिक व्यवस्था के सभी सीटों पर जीत हासिल की थी.
परंतु असंवैधानिक जीटीए को जनता अब खारिज कर चुकी है. उन्होंने कहा कि जीटीए चुनाव को लेकर आज तक मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई भी नोटिस जारी नहीं किया गया है. 2017 में हुये आंदोलन के दौरान पहाड़ अशांत हो गया था. उस अशांत पहाड़ को शांत करने में गोरामुमो ने भी अहम भूमिका निभायी थी. इसलिये पहाड़ की शांति को लेकर जीटीए चुनाव कराना उचित नहीं होगा.लोकसभा चुनाव के संदर्भ में गोरामुमो अध्यक्ष ने कहा कि विगत लोकसभा चुनाव में पहाड़ी की जनता ने भाजपा के झूठे आश्वासन पर वोट देकर सांसद बनाया था.
परंतु भाजपा ने अपने आश्वासन को पूरा नहीं किया. इतना ही नहीं पिछले आंदोलन के दौरान भाजपा ने पहाड़ की जनता के साथ विश्वासघात किया था. जिसके कारण पहाड़ की जनता भाजपा से ‍नाराज है. भाजपा ने पहाड़ की जनता को खुश करने के लिये अब संसद में गोरखालैंड बिल पारित कराना होगा. लोकसभा चुनाव कि घोषणा होते ही राष्ट्रीय दलों के नेतृत्वगण पहाड़ आने लगते हैं. इस वक्त राष्ट्रीय पार्टी के नेतृत्वगणों ने पहाड़ के बारे में क्या-क्या सोचा है, उसको सुनना जरूरी है.