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सिलीगुड़ी : महानंदा नदी का कायाकल्प होने की बढ़ी संभावना, एक्शन प्लान का नाम बदल नमामि गंगे हुआ

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी की लाइफ लाइन माने जाने वाली महानंदा को प्रदूषण मुक्त किये जाने की संभावना बढ़ गयी है. जिसे महानंदा एक्सन प्लान के नाम से जाना गया था. साफ-सफाई के लिए इस नदी को नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल किया जा रहा है. पहले महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए महानंदा […]

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी की लाइफ लाइन माने जाने वाली महानंदा को प्रदूषण मुक्त किये जाने की संभावना बढ़ गयी है. जिसे महानंदा एक्सन प्लान के नाम से जाना गया था. साफ-सफाई के लिए इस नदी को नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल किया जा रहा है. पहले महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए महानंदा एक्शन प्लान लागू किया गया था.

अब इसी एक्शन प्लान को नमामि गंगे प्रोजेक्ट में बदल दिया गया है. इसको लेकर डीपीआर बनाने का काम लगभग हो चुका है. बहुत जल्द इसे क्रियान्वित करने की तैयारी है.

मिली जानकारी के अनुसार महानंदा नदी में शहरों से निकलने वाले नाले के गंदे पानी को सीधे नदी में जाने से रोकना था. जिसके तहत नदी किनारे पाइप लाइन बैठाने के साथ नौकाघाट इलाके में तीन तालाब तथा पंप हाउस बनाने की योजना थी. इस पाइप लाइन के जरिये शहर तथा उसके आसपास के इलाकों से गंदे पानी को तलाब में जमा कर पंप हाउस के सहारे परिशोधित कर वापस महानंदी में छोड़ने की थी. आरोप है कि वाम मोर्चा को हराकर जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आयी तो इस परियोजना को बंद कर दिया गया.
शहरवासियों का कहना है कि महानंदा नदी के साथ शहर के लोगों की एक अलग आस्था जुड़ी है. यह नदी बदलते सिलीगुड़ी की साक्षी रही है. पिछले दिनों एनजीटी ने भी महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई निर्देष जारी किये थे. उसके बाद भी कोई खास लाभ नहीं हुआ. महानंदा नदी की स्थिति जस की तस बनी हुयी है. वर्तमान में तो महानंदा नदी लुप्त होने के कगार पर है. लोगों का ये भी कहना है कि सिर्फ छठ पूजा तथा दुर्गापूजा के समय ही नदी को साफ किया जाता है.
इस विषय पर पूर्व शहरी विकास मंत्री तथा सिलीगुड़ी नगर निगम के वर्तमान मेयर अशोक भट्टाचार्य ने बताया कि महानंदा एक्शन प्लान का उद्देश्य नदी संलग्न इलाकों में सैदर्यकरण के साथ शहर से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में जाने से रोकना था. इस योजना के शुरुआती चरण में पाइप लाइन बनाने के साथ ही ड्रेन तथा बांध बनाने का काम हुआ था. उन्होंने बताया वह काम समाप्त होने के बाद सौ करोड़ रूपये की परियोजना सरकार को दी गयी थी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि महानंदा नदी का कायाकल्प तो हुआ नहीं उल्टे महानंदा नदी के नाम पर घोटाला हो गया.
उन्होंने तत्कालीन एसजेडीए चेयरमैन रुद्रनाथ भट्टाचार्य पर निशाना साधा. उन्होंने बताया कि उसके बाद से लेकर अबतक राज्य सरकार ने महानंदा एक्शन प्लान को लेकर कोई पहल नहीं की है. फिलहाल यह काम अधर में लटका है.दूसरी ओर इस विषय पर एसजेडीए की सीइओ एस पुनमबल्ला ने बताया कि महानंदा एक्शन प्लान का काम शुरू नहीं हुआ.
दोबारा एनजीटी के निर्देश पर डीपीआर बनाने का काम हुआ है. उसके बाद महानंदा एक्शन प्लान का नाम बदल कर नमामि गंगा प्रोजेक्ट किया जा रहा है. इस योजना पर जल्द काम शुरु होगा. इस योजना पर पैसे कहां से खर्च होंगे,इसको लेकर सरकार से बातचीत की जा रही है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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