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विधानसभा चुनाव से पहले डील की कोशिश

सिलीगुड़ी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा गोजमुमो सुप्रीमो एवं जीटीए चीफ बिमल गुरूंग के बीच बुधवार के दिन दाजिर्लिंग में हुई मुलाकात ने भाजपा की नींद उड़ा दी है. भाजपा नेता पहले से ही इस मुलाकात को लेकर काफी आशंकित थे. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के बाद जिस तरह से बिमल गुरूंग ने संवाददाताओं से […]

सिलीगुड़ी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा गोजमुमो सुप्रीमो एवं जीटीए चीफ बिमल गुरूंग के बीच बुधवार के दिन दाजिर्लिंग में हुई मुलाकात ने भाजपा की नींद उड़ा दी है. भाजपा नेता पहले से ही इस मुलाकात को लेकर काफी आशंकित थे. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के बाद जिस तरह से बिमल गुरूंग ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि दुख के दिन अब खत्म हो गये हैं, उससे भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है.

बिमल गुरूंग अभी भी एनडीए में शामिल हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी की अपील को खारिज करते हुए भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलुवालिया का समर्थन किया था और चुनाव में श्री अहलुवालिया की भारी जीत भी हुई थी. उसके बाद से लेकर अब तक सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तथा गोजमुमो के बीच दूरी काफी बढ़ गई थी. बिमल गुरूंग राज्य सरकार पर जीटीए चलाने में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर बिमल गुरूंग ने कई बार केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य भाजपा नेताओं से मुलाकात की. इतना ही नहीं, उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी बातचीत की थी. मदन तामांग हत्याकांड में सीबीआई द्वारा नगर दायरा अदालत में चाजर्शीट दायर करने के बाद बिमल गुरूंग काफी दबाव में हैं. सीबीआई ने बिमल गुरूंग के अलावा उनकी पत्नी आशा गुरूंग सहित 23 गोजमुमो नेताओं के खिलाफ चाजर्शीट दायर कर किया है.

बिमल गुरूंग अभी अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट की शरण में हैं और फिलहाल तीन सप्ताह तक उनकी तथा अन्य आरोपी गोजमुमो नेताओं की गिरफ्तारी पर रोक है. मदन तामांग हत्याकांड में चाजर्शीट दायर होने के बाद से ही बिमल गुरूंग अपने आवास से नहीं निकल रहे थे. हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाये जाने के बाद पहली बार वह अपने पातलेबास आवास से बाहर निकले. दाजिर्लिंग में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की. इस बीच, भाजपा ने दोनों नेताओं के बीच इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. भाजपा के जिला महासचिव नंदन दास ने कहा है कि मुख्यमंत्री दाजिर्लिंग क्षेत्र के पर्वतीय विकास के लिए नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद चुनाव, पंचायत चुनाव तथा अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए बिमल गुरूंग से मिली हैं.

श्री दास ने बताया कि ममता बनर्जी का लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर कोई भरोसा नहीं है. वह हर चुनाव में किसी भी तरीके से जीत चाहती हैं. इसके लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया की हत्या ही क्यों न करनी पड़े. श्री दास ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी को दाजिर्लिंग के विकास की इतनी ही चिंता है, तो उन्होंने अब तक विभिन्न विभागों को जीटीए को स्थानांतरित क्यों नहीं किया है. जीटीए का गठन राज्य सरकार, केन्द्र सरकार तथा गोजमुमो के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुआ है. इस समझौते में राज्य सरकार द्वारा कुछ विभागों को छोड़कर अन्य सभी विभागों को जीटीए को सौंपने की बात कही गई है. बिमल गुरूंग तथा गोजमुमो नेताओं की तमाम कोशिश के बाद भी विभागों को अब तक हस्तांतरित नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, पर्वतीय क्षेत्र में विकास के लिए राज्य सरकार धन भी नहीं दे रही है. ऐसे में अचानक ममता बनर्जी तथा बिमल गुरूंग के बीच इतनी घनिष्ठ दोस्ती कैसे हो गई. उन्होंने बिमल गुरूंग तथा ममता बनर्जी के बीच हुई बातचीत को सार्वजनिक करने की भी मांग की है. उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विकास के लिए नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव में गोजमुमो से डील करने के लिए दाजिर्लिंग गई हुई हैं. श्री दास ने हालांकि इस मामले में बिमल गुरूंग पर हमला नहीं बोला. उन्होंने कहा कि बिमल गुरूंग अभी भी एनडीए में बने हुए हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में उनके समर्थन से भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलुवालिया की भारी जीत हुई. उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि बिमल गुरूंग गोजमुमो में बने रहेंगे.

चुनाव पर नजर

श्री दास ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वर्ष 2011 में गोजमुमो के साथ हुई डील को एक बार फिर से दोहराना चाहती हैं. वर्ष 2011 के चुनाव में दाजिर्लिंग पर्वतीय क्षेत्र के तीनों विधानसभा सीटों पर गोजमुमो उम्मीदवार की जीत हुई थी. तृणमूल कांग्रेस ने तीनों सीटों से अपने उम्मीदवारों को हटा लिया था. बदले में गोजमुमो ने सिलीगुड़ी तथा तराई-डुवार्स इलाके में तृणमूल का समर्थन किया. इस इलाके में तृणमूल की जीत हुई थी. वर्ष 2016 का विधानसभा चुनाव सामने है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर से इसी समीकरण को बनाने की कोशिश में जुटी हुई हैं. इसके साथ ही मुख्यमंत्री की नजर सिलीगुड़ी महकमा परिषद तथा दाजिर्लिंग पंचायत चुनाव पर भी है.

मिल कर लड़ेंगे चुनाव

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा बिमल गुरूंग के बीच हुई मुलाकात पर भले ही भाजपा नेताओं के तेवर तल्ख हैं, लेकिन भाजपा आने वाले दिनों में गोजमुमो के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है. भाजपा महासचिव नंदन दास ने कहा कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद का चुनाव भाजपा ने गोजमुमो के अलावा केपीपी तथा आदिवासी विकास परिषद के साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है. इन तमाम पार्टियों के नेताओं से पहले ही इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है. उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भी भाजपा के साथ गोजमुमो का गठबंधन बना रहेगा.

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