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सियासी बोल: गोरखालैंड के पक्ष में नहीं है भाजपा

दार्जिलिंग: भाजपा गोरखलैंड के पक्ष में नहीं है. यह कहा है विधायक डॉ हर्क बहादुर छेत्री ने. गोजमुमो को अलविदा कहने के बाद डॉ छेत्री पहाड़ में नये राजनीतिक दल का गठन करने जा रहे हैं. इससे पूर्व वह पहाड़ के विभिन्न इलाकों में बैठकें व जनसभा कर रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार को […]

दार्जिलिंग: भाजपा गोरखलैंड के पक्ष में नहीं है. यह कहा है विधायक डॉ हर्क बहादुर छेत्री ने. गोजमुमो को अलविदा कहने के बाद डॉ छेत्री पहाड़ में नये राजनीतिक दल का गठन करने जा रहे हैं. इससे पूर्व वह पहाड़ के विभिन्न इलाकों में बैठकें व जनसभा कर रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार को उन्होंने विजनबारी बजार में एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि विजनबारी के भी महकमा बनने के योग हैं. जनसभा के मंच पर मिरिक क्षेत्र के मोरचा केंद्रीय कमिटी सदस्य संदीप प्रधान ने अपना दल छोड़कर डॉ छेत्री का हाथ थाम लिया.
जनसभा में भाजपा पर निशाना साधते हुए डॉ छेत्री ने कहा कि भाजपा गोरखालैंड के गठन के पक्ष में नही है. उन्होंने कहा कि गोजमुमो में रहते हुए वह कई बार भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात करनेवाले प्रतिनिधमंडल में शामिल रह चुके हैं. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को दार्जिलिंग पहाड़ में कोई दिलचस्पी नही है, हां बंगाल में जरूर है. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के केन्द्रीय कार्यक्रम में गोरखालैंड के बारे में कहीं उल्लेख नहीं है, केवल दार्जिलिंग-डुवार्स क्षेत्र की काफी पुरानी समस्या के समाधान के लिए पुनर्विचार करने की बात का उल्लेख है. उन्होंने कहा 2009 के लोकसभा चुनाव में केन्द्र में भाजपा की सरकार ना बनने की दुहाई देकर पहाड़ की जनता को गुमराह किया गया था. अब केंद्र में भाजपा की बहुमत की सरकार है, पर अब वह राज्यसभा में अल्पमत की दुहाई दे रही है. लेकिन भाजपा को लोकसभा में गोरखालैंड गठन के लिए विधेयक पेश करने से कौन रोक रहा है?

उन्होंने कहा कि भाजपा के गोरखलैंड का विधेयक सदन में पेश कर देने मात्र से अलग राज्य के गठन की उम्मीद हो जायेगी. यदि भाजपा ने ऐसा किया तो मैं भाजपा का दास बन जाऊंगा. यहां तक कि मेरे नाती-पोता तक भाजपा का दास हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि गोजमुमो का गठन करने में यदि विमल गुरूंग ने 35 प्रतिशत मेहनत की है, तो मैंने 75 प्रतिशत की है. यह बात गोजमुमो का पूरा केंद्रीय नेतृत्व जानता है. उन्होंने यह भी कहा कि मोरचा में रहकर मैंने उसे सुधारने का काफी प्रयास किया था, परंतु ऐसा नहीं हो पाया, इसलिए मैंने परेशान होकर मोरचा छोड़ दिया.

उन्होंने कहा कि मोरचा में रहने का मतलब सिर्फ उसके सर्वोच्च नेता के कहने पर सिर हिलाना भर है. इससे ज्यादा और कुछ नहीं. लेकिन मुझसे ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जिन्दा लोग बोलते हैं, चिल्लाते हैं, इसीलिए मैं चिल्ला रहा हूं, बोल रहा हूं. डॉ छेत्री ने कहा कि मोरचा ने आज तक जितने भी कार्यक्रम किये हैं, सबको अधूरा छोड़ा है. गोरखालैंड को लेकर आमरण अनशन शुरू किया गया. समर्थक अपने नेता की बात सुनकर अनशन पर बैठे. कई की किडनी खराब हो गयी, लेकिन मांग पूरी हुए बिना अनशन उठा लिया गया. इसी तरह पिछले दिनों नेता ने एलान किया कि जब तक गोरखालैंड का गठन नहीं होगा, तब तक पदयात्रा करेंगे. लेकिन केवल 64 दिन बादही पदयात्रा छोड़ दी. उन्होंने कहा कि मोर्चा के आन्दोलन फौज की कदमताल की तरह हैं. केवल कदम उठते हैं, लेकिन आगे नहीं बढ़ते.

डॉ छेत्री ने कहा कि मोरचा को छोड़कर मैं अजाद महसूस कर रहा हूं. पहाड़ के लिए एक सच्चे नेतृत्व की जरूरत है. मैं पहाड़ का उद्धार करने के लिए बुद्धिजीवियों को साथ में रखकर नया दल गठित करने जा रहा हूं, जिसमें आप लोगों का साथ जरूरी है. जनसभा को अमर लामा, डॉ महेन्द्र पी लामा समेत कई अन्य लोगों ने भी संबोधित किया.
Prabhat Khabar Digital Desk
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