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आसनसोल से अजहरुद्दीन

प्रदेश कांग्रेस कमिटी करेगी अनुशंसा नेतृत्व से आसनसोल : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन कांग्रेस पार्टी से आगामी लोकसभा चुनाव में आसनसोल संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे अजहरुद्दीन ने स्वयं पश्चिम बंगाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी है. प्रदेश कमेटी […]

प्रदेश कांग्रेस कमिटी करेगी अनुशंसा नेतृत्व से

आसनसोल : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन कांग्रेस पार्टी से आगामी लोकसभा चुनाव में आसनसोल संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे अजहरुद्दीन ने स्वयं पश्चिम बंगाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी है. प्रदेश कमेटी उनके लिए जिन संसदीय क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर रही है, उनमें आसनसोल सबसे ऊपर है.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि सांसद श्री अजहरुद्दीन मुरादाबाद से पार्टी के सांसद हैं. लेकिन उन्होंने उत्तर प्रदेश के बजाय पश्चिम बंगाल से चुनाव लड़ना चाहते हैं. पार्टी नेतृत्व भी चाहता है कि वे इस राज्य से चुनाव लड़े ताकि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्य से पार्टी के एक और सांसद संसद में पहुंच सके. पिछला चुनाव पार्टी ने तृणमूल के साथ गंठबंधन बना कर लड़ा था. उस समय पार्टी को आधा दर्जन सीटों पर जीत मिली थी. लेकिन इस बार तृणमूल ने कांग्रेस के साथ न लड़ कर अपने बलबूते चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. इस स्थिति में पार्टी के सामने अधिक से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य है.

उन्होंने बताया कि सांसद श्री अजहरुद्दीन राज्य में मुस्लिम बहुल इलाके से चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने पहले जंगीपुर संसदीय क्षेत्र को प्राथमिकता दी थी. यहां से राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी सांसद हैं तथा वे इसी सीट से चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं. इसके बाद उन्हें अल्पसंख्यक बहुल संसदीय क्षेत्र मुर्शिदाबाद से खड़ा करने पर विचार किया गया, लेकिन वहां से पार्टी नेता मन्नान हुसैन सांसद है. प्रदेश पार्टी नेतृत्व ने उनके लिए अलग से सीट चयनित करने का निर्णय लिया है.

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि राज्य से पार्टी के छह सांसद हैं. इन छह क्षेत्र में कोई नया प्रत्याशी तब तक नहीं दिया जा सकता, जबतक कि मौजूदा सांसद स्वयं चुनाव लड़ने से इंकार न कर दें. यदि वहां से नया प्रत्याशी सांसद की इच्छा के विरुद्ध दिया गया तो पार्टी में असंतोष और गुटबाजी फैलेगी तथा पार्टी प्रत्याशी के जीतने की संभावना कम हो जायेगी.

इस स्थिति में पार्टी नेतृत्व ने अन्य संसदीय क्षेत्रों की तलाश शुरू कर दी है. इनमें आसनसोल संसदीय क्षेत्र सबसे शीर्ष पर है. इस क्षेत्र में हिंदी भाषी और खास कर मुस्लिम आबादी निर्णायक संख्या में है. अल्पसंख्यक खास कर मुस्लिम ऊदरू का इस्तेमाल अधिक करते हैं. इस क्षेत्र में अजरूद्दीन के प्रशंसक भी बड़ी संख्या में है. सनद रहे कि वर्ष 1985 में कोलकाता के इडेन स्टेडियम में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सेंचुरी बनायी थी तथा उनकी राज्य में काफी प्रशंसा हुई थी. दूसरी सबसे अधिक राहत की बात यह है कि इस सीट से कांग्रेस के किसी बड़े नेता की दावेदारी भी नहीं है. झारखंड का सीमावर्त्ती शहर होने के नाते भी उन्हें काफी समर्थन मिल सकता है.

आसनसोल के अलावा वीरभूम, हावड़ा तथा उलबेयि संसदीय क्षेत्र से भी उन्हें चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है. विरभूम में जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है तो हावड़ा व उलबेरिया में गैर बांग्ला भाषी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि इन सभी संसदीय सीटों की सूची के साथ उनके नाम की अनुशंसा भेज दी जायेगी. पार्टी की केंद्रीय स्कैनिंग कमेटी को प्रत्याशी के बारे में अंतिम निर्णय लेना है.

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