झारखंड के एक डॉक्टर ऐसे भी, जो सरकारी अस्पताल की बाइक एंबुलेंस लेकर महीनों से ड्यूटी से हैं गायब
Jharkhand News: सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिये करीब दो लाख रुपये की लागत से बाइक एम्बुलेंस उपलब्ध कराया गया है, लेकिन चिकित्सक इसका निजी उपयोग कर रहे हैं.
Jharkhand News: झारखंड के गढ़वा जिले में करीब 50 हजार की आबादी वाले रमकंडा प्रखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने लिये स्वास्थ्य विभाग ने यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के रूप में डॉ रामाशीष चौधरी की प्रतिनियुक्ति की थी, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने के लिये पहुंचे ये चिकित्सक खुद तो ड्यूटी से गायब हैं, सरकारी अस्पताल तक मरीजों को लाने के लिये विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी बाइक एम्बुलेंस लेकर भी फरार हैं. ये लंबे समय से ड्यूटी से गायब हैं.
जानकारी के अनुसार इसी वर्ष जून महीने में कोविड-19 के प्रभारी बनाये गये मांडर विधायक बंधु तिर्की की जांच के बाद यहां इस चिकित्सक को स्वास्थ्य विभाग ने प्रतिनियुक्ति किया था. ड्यूटी के शुरुआती समय में इन्होंने रंका से रमकंडा अस्पताल तक पहुंचने में हो रही परेशानी का बहाना बनाकर पहले मोटरसाइकिल एम्बुलेंस से मोटरसाइकिल को अलग कराया. उसके बाद बाइक पर लगे एम्बुलेंस का लोगो को मिटाकर उसे प्राइवेट बाइक बनाकर कुछ दिनों तक रंका से यहां पहुंचकर अस्पताल में ड्यूटी की, लेकिन मोटरसाइकिल हाथ लगने के कुछ दिनों बाद से रमकंडा अस्पताल में ड्यूटी करना ही छोड़ दिया.
ऐसे में बाइक से अलग किया गया एम्बुलेंस का स्ट्रैक्चर कबाड़ में तब्दील हो रहा है. उल्लेखनीय है कि सुदूर जंगल व दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण चार पहिया एम्बुलेंस के नहीं पहुंचने की वजह से मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिये करीब दो लाख रुपये की लागत से विभाग ने इस तरह के क्षेत्रों में मोटरसाइकिल एम्बुलेंस उपलब्ध कराया है, लेकिन मरीजों को लाभ देने की बजाय खुद चिकित्सक इसका निजी उपयोग कर रहे हैं.
रमकंडा प्रखंड की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण यहां के गरीब मरीज पैसे के अभाव में देसी चिकित्सकों के यहां इलाज कराते हैं. इसी कारण इलाज में लापरवाही की वजह से वर्ष 2017 में मलेरिया से प्रखंड के 17 बच्चों की मौत हुयी थी. इसके बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार तो हुआ, लेकिन धीरे-धीरे स्वास्थ्य व्यवस्था लचर होती चली गयी. बताया जाता है कि चिकित्सक डॉ रवि प्रकाश के तबादले के बाद प्रतिनियुक्त चिकित्सक डॉ रामाशीष चौधरी महीनों तक गायब रहते हैं. वहीं एक बार पहुंचकर अन्य दिनों की हाजिरी बनाकर घंटे भर में चले जाते हैं. ऐसे में रमकंडा में बना 100 बेड के अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था सीएचओ सुचिता लकड़ा व एएनएम मुक्ति टोप्पो व उषा कुमारी के भरोसे चल रहा है.
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अस्पताल में ड्यूटी कर रहे कर्मियों ने बताया कि चिकित्सक की ड्यूटी सप्ताह में मंगलवार व शुक्रवार को है, लेकिन वे अस्पताल की बजाय हाजिरी में ही उपस्थित रहते हैं. महीना में कभी आने पर अन्य दिनों की हाजिरी बना लेते हैं. इलाज कराने के लिये अस्पताल पहुंचे रोहड़ा गांव निवासी आशिक मंसूरी, कुरुमदारी के एतवा मुंडा ने बताया कि पहले अस्पताल जाने पर चिकित्सक नहीं मिले. घंटो बाद दोबारा अस्पताल पहुंचने पर भी चिकित्सक गायब थे. इसके कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. अस्पताल में वेट मशीन, सुगर व बीपी की मशीन खराब पड़ी है. पर्याप्त दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं. इसी तरह प्रसव कराने अस्पताल पहुंची शीतला देवी के परिजनों ने बताया कि मरीज को देखने के लिये चिकित्सक नहीं आते हैं. एएनएम ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करती हैं.
ड्यूटी से गायब रहने के संबंध में पूछे जाने पर चिकित्सक डॉ रामाशीष चौधरी ने कहा कि वे रमकंडा का अस्पताल क्यों जायेंगे. चार-चार जगह ड्यूटी थोड़े करेंगे. फिर भी मरीज रहता है तो जाते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मोटरसाइकिल एम्बुलेंस सड़ रहा था. इसलिये मोटरसाइकिल की सर्विसिंग कराने के लिये लाये हैं. इधर, अस्पताल की दयनीय व्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर सिविल सर्जन कमलेश कुमार ने इस मामले पर बात करने से सीधे इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अभी वैक्सिनेशन पर बात करिये. अस्पताल की समस्या तो है ही.
रिपोर्ट: मुकेश तिवारी