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Jharkhand News : 1932 में रैयती जमीन 1982 में हो गया सरकारी, धनबाद में नहीं कट रही ऑनलाइन रसीद

झारखंड मे भूमि सर्वेक्षण नहीं होने से कई रैयतों को इनदिनों परेशानी झेलनी पड़ी रही है. धनबाद के कई ऐसे रैयत हैं जिनका वर्ष 1932 के सर्वे में खतियानी जमीन दर्ज था. वहीं, वर्ष 1982 के सर्वे में इस गैर आबाद यानी सरकारी बताया गया है. ऐसे ही कई मामले आज भी सीओ काेर्ट में चल रहे हैं.

Jharkhand News (संजीव झा, धनबाद) : वर्ष 1932 के सर्वे में जो जमीन खतियानी यानी रैयती था. वह 1982 के सर्वे में गैर आबाद यानी सरकारी हो गया. पिछला भू-सर्वे के पूर्ण हुए लगभग 20 वर्ष से अधिक हो गये. लेकिन, आज भी धनबाद जिला के भू-बंदोबस्त कार्यालय तथा विभिन्न अंचलों में अंचलाधिकारी के न्यायालय में ऐसे जमीन के स्वामित्व को लेकर मामले चल रहे हैं. कई भू-धारक सिविल कोर्ट में टाइटल सूट का मुकदमा लड़ रहे हैं. इन जमीनों का ऑनलाइन रसीद भी नहीं कट रहा है. इन जमीनों की खरीद-बिक्री भी बंद है.

क्या है मामला

आजादी के पहले पूरे देश में भू- सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था. इसके बाद अविभाजित बिहार के समय वर्ष 1982 में यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे कार्य शुरू हुआ था. धनबाद जिला के अधिकांश प्रखंडों में यह सर्वे मौजावार वर्ष 1982 से शुरू होकर वर्ष 2000 तक चला. बहुत सारा मौजा में यह काम वर्ष 1995 में ही पूर्ण हो गया. इस सर्वे के दौरान लगभग सभी अंचलों में कई जमीन का नेचर बदल गया. रैयती से गैर आबाद आम या गैर आबाद अनावद बना दिया गया.

केस स्टडी 1

गोविंदपुर अंचल के बरमसिया के किसान बंशीधर महतो. इनका बरमसिया मौजा के हाल खाता संख्या 263, खेसरा नंबर 2094, 2104, 2124, 2085 में कुल रकवा 1.32 डिसमिल जमीन है. यह जमीन उनलोगों की पुश्तैनी है. इसका लगान रसीद भी वर्ष 2014-15 तक कटता रहा. लेकिन, पिछले सर्वे में इस जमीन को गैर आबाद खाता में डाल दिया गया. रैयत ने इसके खिलाफ भू-बंदोबस्त न्यायालय में मुकदमा किया. वहां से जीत भी गये. लेकिन, आज भी इस जमीन का नेचर नहीं बदला. वर्ष 2016 से ही लगातार गोविंदपुर सीओ कार्यालय के यहां चक्कर काट रहे हैं.

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केस स्टडी 2

बिराजपुर निवासी शंकर पांडेय ने कहा कि जिस जमीन पर उनके पूर्वज वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं. उस जमीन को सर्वे में गैर आबाद बिहार, झारखंड सरकार कर दिया गया है. वर्ष 2017 तक लगान रसीद भी कटा है. इसके बाद रसीद काटना बंद कर दिया गया है. सर्वे में भारी गड़बड़ी हुई है. सरकार व पदाधिकारियों की गलत नीति के कारण घर- घर में लड़ाई बढ़ गयी है. क्योंकि खाता, प्लाट चढ़ाने में काफी गड़बड़ी हुई है. सरकार को जांच करा कर गलत सर्वे को सुधारना चाहिए. गरीब लोग केस नहीं लड़ पायेंगे. केस लड़ने में लाखों रुपये खर्च होता है. बिराजपुर मौजा मे 80. 65 एकड जमीन गैर आबाद बिहार सरकार कर दिया गया है.

केस स्टडी 3

खंडेरी गांव निवासी टीका राम महतो ने बताया कि उनके दादा खेदु महतो (अब स्वर्गीय) के नाम से खंडेरी मौजा में 4 एकड़ जमीन है. यह जमीन राजा ने पट्टा पर दिया था. वर्ष 2000 तक मालगुजारी रसीद भी कटा है. नया सर्वे में जमीन को गैर आबाद कर दिया गया है. इसके कारण रसीद नहीं कट रहा है. पदाधिकारियों द्वारा आज तक नोटिस भी नहीं मिला है.

केस स्टडी 4

चकपलैया, सुखलकाड़ा निवासी विपिन मांझी ने बताया कि बंदोबस्ती में उनके परिवार को एक एकड़ जमीन मिली थी. नया सर्वे में उक्त जमीन का खाता उनके नाम से नहीं खुलने के कारण ऑनलाइन रसीद नहीं कट रहा है. अंचल कार्यालय दौड़ते, दौड़ते परेशान हैं. नया सर्वे रैयतों के लिए अभिशाप बन गया है.

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समय पर जवाब, कागजात नहीं देने वाले को ही परेशानी : DLSO

जिला भू-बंदोबस्त पदाधिकारी (District Land Settlement Officer – DLSO) प्रभाकर सिंह के अनुसार, पिछले सर्वे में कुछ जमीन का नेचर बदला है. कई मामलों में कुछ ऋटियां भी सामने आयी है. लेकिन, इसका मुख्य वजह सर्वे प्रक्रिया के दौरान रैयतों द्वारा समय पर कागजात समय पर उपलब्ध नहीं कराना भी है. कहा कि सर्वे में अंतिम प्रकाशन से पहले हर गांव में कई बार मापी, आम इश्तेहार जारी होता है. इसके बाद भी जिन लोगों ने यहां भू-बंदोबस्त कार्यालय में मुकदमा किया है. उनके मामलों को जल्द से जल्द एएसओ न्यायालय से निष्पादित किया जा रहा है. बहुत सारे मामलों में निष्पादन के बाद सुधार कर नया नक्शा भी जारी किया गया है.

Posted By : Samir Ranjan.

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