Makar Sankranti 2024 Date: न्यू इयर सेलिबरेशन के बाद अब शहर मे लोहड़ के साथ-साथ मकर संक्रांति कीतैयारी शुर हो चुकी है. हर तरफ चौक-चौराहों पर तिलकुट की दुकाने सज गयी है, जहां तरह-तरह की वेरायटी मे तिलकुट उपलब्ध है. लोग इसे न केवल अपने लिए खरीद रहे है, बल्कि अपने दोस्तों व सगे-संबंधियों के यहां तिलकुट सौगात के रप में भेज भी रहे है. आइए जानते है मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सही डेट कब है…
मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी यानी सोमवार को शतभिषा नक्षत्र में मनाया जायेगा, इस दिन दान-पुण्य करने से उसका सौ गुना पुण्य फल प्राप्त होता है. पौष शुक्ल चतुर्थ को सूर्यदेव का मकर राशि में गोचर होगा. इसी दिन से सूर्य दक्षिणायण से उतरायण हो जाएंगे. सूर्य का मकर राशि मे गोचर 15 जनवरी की सुबह 8 बजकर 42 मिनट पर होने से इसका पुण्यकाल पूरे दिन रहेगा. 15 जनवरी को शतभिषा नक्षत्र के साथ रवियोग भी रहेगा, इस दिन गंगा सनान, तीर्थ सनान, ऊनी वस्त्र, तिल, कंबल, जूता, धार्मिक पुस्तक, अन, स्वर्ण आदि का दान करना विशेष पुण्यफल कारक होता है.
मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं का दान शनिदेव की विशेष कृपा को घर परिवार मे लाता है. सूर्य मकर से मिथुन राशि तक उतरायण में और कर्क से धनु राशि तक दक्षिणायण रहते है. भीष्म ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उतरायण होने की पतीकषा की थी. मकर संक्रांति के दिन गंगा सनान करने से एक हजार अशमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. उत्तरायण खासतौर पर गुजरात में मनाया जाने वाला पर्व है. नई फसल और ऋतु के आगमन पर यह पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाता है, इस मौके पर गुजरात में पतंग उड़ाई जाती है. इसके साथ ही पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो दुनियाभर में मशहूर है. उत्तरायण पर्व पर व्रत रखा जाता है और तिल व मूंगफली के दाने की चक्की बनाई जाती है.
मकर संक्रांति के दिन रवि योग बन रहा है. यह योग सुबह 7 बजकर 15 मिनअ से सुबह 8 बजकर 07 मिनट तक है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार रवि योग में स्नान करके सूर्यदेव की पूजा करना सबसे ज्यादा लाभकारी माना जाता है. मकर संक्रांति का महा पुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 09 बजे तक है. इस समय में आपको मकर संक्रांति का स्नान और दान करना चाहिए. ज्योतिषाचार्य के अनुसार पुण्य काल में भी मकर संक्रांति का स्नान दान करना शुभ माना जाता है. मकर संक्रांति का पुण्य काल 10 घंटे 31 मिनट तक रहेगा. मकर संक्रांति पर पुण्य काल सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शाम 05 बजकर 46 मिनट तक है.
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नई फसल और नई ऋतु के आगमन के तौर पर भी मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाती है. पंजाब, यूपी, बिहार समेत तमिलनाडु में यह वक्त नई फसल काटने का होता है, इसलिए किसान मकर संक्रांति को आभार दिवस के रूप में मनाते हैं. खेतों में गेहूं और धान की लहलहाती फसल किसानों की मेहनत का परिणाम होती है, लेकिन यह सब ईश्वर और प्रकृति के आशीर्वाद से संभव होता है. पंजाब और जम्मू-कश्मीर में मकर संक्रांति को ‘लोहड़ी’ के नाम से मनाया जाता है. तमिलनाडु में मकर संक्रांति ‘पोंगल’ के तौर पर मनाई जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में ‘खिचड़ी’ के नाम से मकर संक्रांति मनाई जाती है. मकर संक्रांति पर कहीं खिचड़ी बनाई जाती है तो कहीं दही चूड़ा और तिल के लड्डू बनाये जाते हैं.