कोलकाता : नंदीग्राम विधानसभा सीट वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित सीट बन गया है. इस विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ रही हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके खिलाफ मेदिनीपुर के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है.
ममता बनर्जी ने शिवरात्रि से एक दिन पहले 10 मार्च को नामांकन दाखिल करने की घोषणा की है, तो शुभेंदु अधिकारी शिवरात्रि के अगले दिन यानी 12 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगे. शुभेंदु अधिकारी वर्ष 2016 के चुनाव में नंदीग्राम से ही जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.
हालांकि, भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने बंगाल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भी सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. विधानसभा की सदस्यता और पार्टी के पदों से इस्तीफा देने से पहले शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की कैबिनेट से इस्तीफा दिया था.
पूर्वी मेदिनीपुर जिला का नंदीग्राम पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब बंगाल में बुद्धेव भट्टाचार्य की अगुवाई में चल रही वाम मोर्चा सरकार ने उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण की शुरुआत की थी. नंदीग्राम के लोगों ने सरकार के फैसले का विरोध किया और तब विपक्ष में रहने वालीं ममता बनर्जी ने उनके आंदोलन को हवा दी.
कहा जाता है कि ममता बनर्जी चेहरा थीं, लेकिन पर्दे के पीछे से शुभेंदु अधिकारी इस आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार कर रहे थे. इसमें उनके पिता शिशिर अधिकारी, भाई दिव्येंदु अधिकारी समेत राजनीति में सक्रिय परिवार के सभी सदस्यों ने अहम भूमिका निभायी. नंदीग्राम के आंदोलन की वजह से ही वाम मोर्चा सरकार का पतन हुआ और ममता की तृणमूल कांग्रेस सरकार का उदय हुआ. हालांकि, तृणमूल का कहना है कि ममता बनर्जी की वजह से शुभेंदु नेता बने. वह कोई बड़े नेता नहीं हैं.
आज ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी न केवल अलग हो चुके हैं, बल्कि दोनों आमने-सामने हैं. शुभेंदु ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा सीट पर कम से कम आधा लाख यानी 50 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराने का निश्चय किया है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा है कि वह अपना इस्तीफा लिखकर रख लें. 2 मई को जब चुनाव परिणाम आयेंगे, तब पता चलेगा कि नंदीग्राम का असली किंग कौन बनेगा.
Posted By : Mithilesh Jha