यूपी में विधानसभा के चुनावी शंखनाद से पहले सत्ताधारी दल बीजेपी और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच सियासी घमासान शुरू हो गया है. यूपी में इस बार इलेक्शन कैंपेन में बंगाल की तर्ज पर टू विंडोज पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. इससे बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. आइए जानते हैं क्या है टू विंडोज पॉलिटिक्स.
दरअसल, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव पीएम मोदी की जनसभा के दिन रैली का आयोजन करते हैं. दोनों की रैली का शेड्यूल लगभग एक टाइम में ही रहता है. बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ममता बनर्जी की तरह रैली का आयोजन करते हैं, जिससे पीएम मोदी के बयान पर तुरंत पलटवार किया जा सके.
टू विंडोज का क्या होता है मतलब- टू विंडोज शब्द का निहितार्थ टीवी स्क्रीन से है. टीवी पर जब एक साथ लाइव के दौरान दो लोगों को हाफ-हाफ स्क्रीन में दिखाया जाता है, तो उसे टू विंडोज कहते हैं. पीएम मोदी की रैली के साथ अखिलेश यादव इसी स्पेस में एंट्री करने की कोशिश में जुटे हैं.
सपा को सता रहा मोदी मैजिक का डर- सपा रणनीतिकारों को यूपी चुनाव में मोदी मैजिक का डर सता रहा है. पार्टी इसलिए पीएम मोदी की किसी भी रैली और स्पीच को जनता में प्रभावी नहीं बनने देना चाहती है. समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर यूपी का चुनाव अखिलेश यादव वर्सेज पीएम मोदी हो गया, तो इसमें सीटों का नुकसान हो सकता है.
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20 अक्टूबर 2021: पीएम नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर में एयरपोर्ट का लोकार्पण करने पहुंचे थे, अखिलेश यादव ने इसी दिन ओम प्रकाश राजभर से गठबंधन का ऐलान कर दिया.
25 अक्टूबर 2021: पीएम मोदी सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेजों सहित कई परियोजनाओं का शिलान्यास करने आए थे. इसी दिन सपा सुप्रीमो ने बसपा के दो बड़े नेताओं लालजी वर्मा व रामअचल राजभर को पार्टी में शामिल किया.
25 नवंबर 2021 : मोदी ने नोएडा में जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास करने पहुंचे थे. अखिलेश यादव इसी दिन लखनऊ में जनवादी क्रांति पार्टी की रैली में शामिल होने पहुंचे. यहां जनसभा को संबोधित भी किया.
07 दिसंबर 2021 : पीएम मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में एम्स, आईसीएमआर का उद्घाटन करने आए थे. अखिलेश यादव ने इसी दिन पश्चिम यूपी के मेरठ में जयंत चौधरी के साथ गठबंधन रैली किया.
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