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लालू दोषी करार,18 फरवरी को होगा सजा का ऐलान

चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव सहित 75 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है जबकि सजा का ऐलान 18 फरवरी को होगा. सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत ने पशुपालन घोटाले के सबसे बड़े मामले आरसी-47ए/96 में आरोपितों की ओर से बहस पूरी हो गयी थी.

इससे पूर्व शनिवार को आरोपित वेटनरी डॉक्टर शैलेंद्र कुमार सिन्हा की ओर से बहस पूरी हो गयी. लालू प्रसाद से जुड़े चारा घोटाले के बहुचर्चित पांच मामलों में से पांचवें व अंतिम मामले में बिशेष अदालत 99 आरोपितों के बारे में फैसला सुनाया है बहस समाप्त होने के बाद सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने बताया कि फैसले के दिन सभी 99 आरोपितों को फिजिकल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था.

575 गवाहों की गवाही दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 575 गवाहों की गवाही दर्ज करायी गयी. बचाव पक्ष की ओर से 25 गवाह पेश किये गये. मामले में 13 ट्रंक (बक्सा) कागजात प्रस्तुत किया गया. डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ की अवैध निकासी हुई थी. मामले की शुरुआत में 170 आरोपित थे. इसमें से 55 आरोपितों की मौत हो गयी. दीपेश चांडक, आरके दास समेत सात आरोपितों को सीबीआइ ने गवाह बनाया. सुशील झा और पीके जायसवाल ने निर्णय पूर्व दोष स्वीकार किया. मामले में छह नामजद आरोपित फरार हैं.

लालू प्रसाद दोषी करार

मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, डॉ आरके राणा, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष धुव्र भगत, तत्कालीन पशुपालन सचिव बेक जुलियस, पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ केएम प्रसाद सहित 99 आरोपितों के बारे में अदालत 15 फरवरी को फैसला सुनाया है. सीबीआइ की विशेष अदालत ने पशुपालन घोटाले की आरसी 47ए/96 में 26 सितंबर 2005 को चार्ज फ्रेम किया था. वर्ष 2001 में सीबीआइ की ओर से चार्जशीट दाखिल की गयी थी.

क्या है चारा घोटाला

इसे भले ही चारा घोटाला कहा जाता है लेकिन मामला सिर्फ चारे का नहीं है. असल में, यह सारा घपला बिहार सरकार के ख़ज़ाने से ग़लत ढंग से पैसे निकालने का है. कई वर्षों में करोड़ों की रक़म पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाली है. जांच के बाद पता चला कि ये सिलसिला वर्षों से चल रहा था. शुरुआत छोटे-मोटे मामलों से हुई लेकिन बात बढ़ते-बढ़ते तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तक जा पहुंची.

कितने का हुआ घोटाला ? 

मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर अब 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है और कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घपला कितनी रक़म का है क्योंकि यह वर्षों से होता रहा है और बिहार में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुई हैं.मामले में फंसे लालू यादव को इस सिलसिले में जेल तक जाना पड़ा है, उनके ख़िलाफ़ सीबीआई और आयकर की जांच हुई, छापे पड़े और अब भी वे कई मुक़दमों का सामना कर रहे हैं.

Prabhat Khabar Digital Desk
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