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भारतीय मूल के विवेक मूर्ति बनेंगे अमेरिकी सर्जन जेनरल

वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने अगले सर्जन जेनरल के रूपभारतीय मूल के विवेक मूर्ति के नाम पर स्‍वीकृति दे दी है. अमेरिका में विपक्षी रिपब्लिकन और बंदूकों की पैरोकार शक्तिशाली लॉबी के विरोध के बावजूद 37 वर्षीय मूर्ति के नाम पर मुहर लगा दी गयी है. मूर्ति अमेरिका के अब तक के सबसे कम उम्र के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 16, 2014 2:15 PM
वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने अगले सर्जन जेनरल के रूपभारतीय मूल के विवेक मूर्ति के नाम पर स्‍वीकृति दे दी है. अमेरिका में विपक्षी रिपब्लिकन और बंदूकों की पैरोकार शक्तिशाली लॉबी के विरोध के बावजूद 37 वर्षीय मूर्ति के नाम पर मुहर लगा दी गयी है.
मूर्ति अमेरिका के अब तक के सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल होंगे. नामांकित किए जाने के बाद अमेरिकी सीनेट में कल 51 मतों में 43 मत मूर्ति के पक्ष में आए इसके बाद उनके नाम की पुष्टि की गई. मूर्ति ऐसे पहले भारतीय-अमेरिकी होंगे जो इस भूमिका का निर्वहन करेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले साल नवंबर में उनको नामांकित किया था. मूर्ति के नाम की पुष्टि के बाद ओबामा ने कहा कि उनके नाम पर सहमति बनना देश के अलावा विदेशों में भी अमेरिकियों के जीवन की रक्षा सुनिश्चित करेगा और इससे देश की स्थिति भी बेहतर होगी. उनके नामांकन पर बंदूक अधिकार की पैरोकार शक्तिशाली लॉबी ‘नेशनल राइफल एसोसिएशन’ और रिपब्लिकन सांसदों ने कड़ा विरोध जताया था.
ओबामा ने कहा ‘देश के अगले सर्जन जर्नल पद के लिए विवेक मूर्ति के नाम पर सीनेट की स्वीकृति की मैं सराहना करता हूं’. उन्होंने कहा ‘अमेरिका के डॉक्टर के तौर पर विवेक मूर्ति प्रत्येक अमेरिकी और उनके परिवार को सुरक्षित जीवन जीने के लिए आवश्यक सारी जानकारियां मिलें, ऐसा जमीनी तौर पर सुनिश्चित करना है’.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ‘जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में वह अपने जीवन के सारे अनुभवों का प्रयोग करेंगे जिनमें उनकी प्राथमिकता नयी तरह की बीमारियों की रोकथाम कर हमारे बच्चों के स्वस्थ और तंदुरुस्त विकास में मदद करना होगी’.ओबामा ने कहा कि मूर्ति हमें देश में ईबोला और उसके स्त्रोत, दोनों के खिलाफ संघर्ष में मदद पहुंचाएंगे. मूर्ति के नाम पर अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन डायबिटिज एसोसिएशन सहित 100 से अधिक स्वास्थ्य संगठनों ने समर्थन किया है.
इससे पहले मूर्ति के नाम पर स्वीकृति के लिए जोरदार समर्थन करते हुए सीनेटर डिक डर्बिन ने मोटापा, तंबाकू जनित बीमारियों और अन्य असाध्य बीमारियों से लडने में उनके समर्पण की सराहना की. अमेरिका में मृत्यु के 10 कारणों में सात प्रमुख कारण इन्हीं बीमारियों से संबंधित हैं और अमेरिका का स्वास्थ्य सुरक्षा पर खर्च का 84 प्रतिशत इन्हीं बीमारियों पर होता है. सांसद अमि बेरा ने कहा, ‘अगले सर्जन जर्नल के तौर पर विवेक मूर्ति के नाम की पुष्टि होने से मैं बहुत खुश हूं’. वर्तमान अमेरिकी कांग्रेस में बेरा एकमात्र भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं.
मूर्ति बोर्ड ऑफ ट्रायल नेटवर्क्‍स के सह संस्थापक और अध्यक्ष रहे हैं. वर्ष 2007 से इसे एपरनिकस के नाम से जाना जाता है. वर्ष 1995 में वे विजन वर्ल्‍डवाइड के सह संस्थापक रहे. यह भारत और अमेरिका में एचआईवी (एड्स) की शिक्षा के लिए एक मुनाफा रहित संगठन था. वह 1995 से लेकर 2000 तक उसके अध्यक्ष और फिर वर्ष 2000 से 2003 तक वह बोर्ड के चेयरमैन रहे.
मूर्ति ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बी.ए. की और फिर उन्होंने येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए और येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से एम.डी. की डिग्री हासिल की.

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