पेट की चिंता में चुनावी ताप भी कम नहीं

अजय कुमारगदबेर होने को है. हम राजगीर पहुंचे. कुंड के पास कुछ लोग बैठे हैं. कुछ फर्लाग पर टमटमवाले जमा हैं. आपस में अपनी आमदनी के बारे में बतिया रहे हैं. पर कोई सच नहीं बता रहा है. महेश कहते हैं: ससुरे नेतवन की तरह बोल रहा है. ठहाका गूंजता हैं. बात आमदनी से होते […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

अजय कुमार
गदबेर होने को है. हम राजगीर पहुंचे. कुंड के पास कुछ लोग बैठे हैं. कुछ फर्लाग पर टमटमवाले जमा हैं. आपस में अपनी आमदनी के बारे में बतिया रहे हैं. पर कोई सच नहीं बता रहा है. महेश कहते हैं: ससुरे नेतवन की तरह बोल रहा है. ठहाका गूंजता हैं. बात आमदनी से होते हुए नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार पर पहुंच जाती हैं.

टुन्ना कहते हैं: लालू जी को मत भूलो. उनके पास भी कम भोट नहीं है. किनारे खड़े रामप्रवेश इस बतकुचन में प्रवेश करते हैं. उनकी बात दंग करने वाली हैं. सभी उनको ध्यान से सुनते हैं. रामप्रवेश की उम्र वहां खड़े लोगों में थोड़ी ज्यादा है. इस नाते सब उनको भइया पुकारते हैं. भइया कहते हैं: दोनों बिहारी नेताओं के मिल जाने से उनकी ताकत बढ़ गयी है. लेकिन मोदी जी को कम मत आंको.

शाम गहराने के साथ ही कुंड के आसपास सन्नाटा पसरने लगता है. कुछ खोमचे वाले अब भी व्यस्त हैं. पानी-पूरी और चाट की महक फैल रही हैं. बीच-बीच में टूरिस्ट गाड़ियां सर्र-सर्र निकल रही हैं. टमटम वाले निकलने की जल्दीबाजी में हैं. वे राजगीर के अगल-बगल के रहने वाले हैं. महेश कहते हैं: त इ चुनाव में की होतवौ? भइया कहते : मेहरी से जाके पूछ लेलकौ. जे कहे, उही केलकवौ. रामप्रवेश टोकते है: अहो भइया, अप्पन बूढ़े बाबा के एह बार की होतै. बूढ़े बाबा मतलब राजगीर के विधायक सत्यनारायण आर्य. रामप्रवेश टमटम को हांकते हुए कहते हैं: हम की कहतवौ. दरोगा जी भी घूम रहे हैं. वाह घोड़े की पूंछ दबाते हैं. मुंह से आवाज निकालते हैं. घोड़े को जैसे उस आवाज की प्रतीक्षा थी. वह टाप मारता हुआ निकल जाता है.

लाइट जल चुकी है. कुंड के सामने खाने की दुकानें सज गयी हैं. चकचक. कुछ टूरिस्ट आते हैं. विजय प्रताप बनारस से आये हैं. वह बनारस में गोदौलिया इलाके के रहने वाले हैं. गया आये थे, तो सोचा, क्यों नहीं राजगीर-नालंदा भी घूूम लिया जाए. उनके चाचा भी साथ में हैं. कहते हैं: हम हर साल गया आते हैं. पिछले पांच साल से लगातार आ रहे हैं. पहली बार जब आना हुआ, तो बिहार के बारे में एक छवि बनी बैठी थी. यहां आने के बाद पता चला कि हम यहां के लोगों के बारे में गलत सोच रहे थे. लेकिन राजगीर के बारे में उनका मानना है कि यहां ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि टूरिस्ट बोर न हों. शाम सात बजे ही सन्नाटा छा गया है. विजय प्रताप यहां से पावापुरी जाना चाहते हैं. सुबह निकलेंगे. वहां पुणो, इलाहाबाद से आये कुछ लोग मिलते हैं.

रामकिशुन गिरियक के रहने वाले हैं. राजगीर में ही रहना होता है. वह काफी नाराज हैं. कहते हैं: यहां के टमटमवालों से आप क्या बात कर रहे थे? वे अच्छे लोग नहीं हैं. दिन में आते, तो देखते. कैसे टूरिस्ट को बैठाने के लिए झंझट करता है. बगल में खड़े विनय कहते हैं: इसमें गलत क्या है? हर आदमी अपना ग्राहक खोजता है. तुम होटल में ग्राहक को बैठाने के लिए सड़क तक चले जाते हो कि नहीं? विनय की बात में दम है. वह कहता है: सब गरीबे का निवाला छीनने पर पड़ा रहता है. रामकिशुन कहते हैं: चले आये गरीब की चिंता करने. नेता लोग हैं न. हम पूछते हैं: किधर का हवा है, इसबार. रामकिशुन कहते हैं: हवा- बयार के बारे में हम क्या बताएं. वोट के दिन देखा जायेगा. जो मन में आयेगा, उसी समय बटन दबा देंगे.

मनोज वहीं होटल चलाते हैं. हम सीधे उनसे चुनाव पर बात करना चाहते हैं. पर वह हमें घुमाने लगते हैं. कहते हैं: हम क्या बतायें? हम तो अपने धंधे में फंसे रहते हैं. हमने उनसे उनके धंधे के बारे में बात शुरू की. कहने लगे: क्या चलेगा. देख रहे हैं, अभिए सुनसान हो गया है. अक्टूबर से फरवरी तक सीजन रहता है. उसके बाद टापाटोइंया लोग आते रहते हैं. मनोज के दादा राजस्थान से यहां आये थे. तब से उनका परिवार यहीं का होकर रह गया. वह कहते हैं: परसों ही दारोगा जी आये थे. इन्हीं दोनों के बीच मुकाबला है. कौन दोनों? वह कहते हैं: आर्य जी और रवि ज्योति जी के बीच. किसका पलड़ा भारी लगता है, हमने पूछा. वह कहते हैं: हम ये कइसे बता सकते हैं. मोदी जी कह रहे हैं कि बदलाव होना चाहिए. आर्य जी 40 साल से विधायक हैं. तो बदलाव होना चाहिए कि नहीं? उनके पोलिटिकल ज्ञान पर हम निरूत्तर थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >