उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ चीन-अमरीका एकजुट

ब्रजेश उपाध्याय बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन छह साल बाद एक बार फिर से वॉशिंगटन में पचास से ज़्यादा देशों के नेता परमाणु सुरक्षा को मज़बूत करने के तरीकों पर बहस करने के लिए जमा हुए हैं. सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी मज़बूत है और लोहे की जालियां और बख़्तरबंद गाड़ियां एक तरह से दीवार बनकर खड़ी हैं. लेकिन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 1, 2016 9:52 AM
उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ चीन-अमरीका एकजुट 4

छह साल बाद एक बार फिर से वॉशिंगटन में पचास से ज़्यादा देशों के नेता परमाणु सुरक्षा को मज़बूत करने के तरीकों पर बहस करने के लिए जमा हुए हैं.

सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी मज़बूत है और लोहे की जालियां और बख़्तरबंद गाड़ियां एक तरह से दीवार बनकर खड़ी हैं.

लेकिन ज़ाहिर है कि ये दीवार परमाणु हमले का सामना नहीं कर सकती और ये अहसास इस सम्मेलन का अहम हिस्सा है ख़ासकर तब जबकि ये माना जा रहा है कि ब्रसेल्स के चरमपंथी हमलावर कुछ ही महीनों पहले बेल्जियम के परमाणु ठिकानों की टोह ले रहे थे और उनपर निशाना लगाने की ताक में थे.

परमाणु हथियारों को इस्लामिक स्टेट और दूसरे चरमपंथी गुटों के हाथ में पड़ने से कैसे रोका जाए ये इस बहस का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा है.

लेकिन साथ ही उत्तरी कोरिया का परमाणु कार्यक्रम भी ख़ासी चिंता पैदा कर रहा है.

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि चीन और अमरीका उत्तर कोरिया को और मिसाइल परीक्षण करने से रोकने के लिए एकसाथ प्रयास करेंगे.

हाल के हफ्तों में उत्तर कोरिया हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर चुका है और बार बार वह मिसाइल परीक्षण करता रहा है और उसने पश्चिमी देशों को धमकी भी दी है.

ओबामा गुरुवार को वॉशिंगटन में परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले.

ओबामा ने कहा कि वह और शी जिंनपिंग इस बात पर सहमति के लिए प्रयास कर रहे हैं कि "हम परमाणु मिसाइल परीक्षण जैसे कदमों को कैसे कम कर सकते हैं, जो तनाव बढ़ाते है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं."

राष्ट्रपति ओबामा ने जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं को भी यकीन दिलाया कि वो पूरी तरह से उनके साथ खड़े हैं.

चीन उन गिने-चिने देशों में से है जिसके साथ ओबामा ने इस बैठक के दौरान द्विपक्षीय बातचीत की है लेकिन वहां भी एजेंडे पर उत्तर कोरिया सबसे ऊपर था.

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भारत और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम सुर्खियों में तो नहीं है लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने अपने बयान में इलाक़े की पेचीदगियों का ख़ासतौर से ज़िक्र किया.

माना जा रहा है कि बहस के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परमाणु सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ज़िक्र तो करेंगे ही, पाकिस्तान के उन छोटे और आसानी से इस्तेमाल होनेवाले परमाणु हथियारों या टैक्टिकल वेपंस के ग़लत हाथों में जाने की चिंताओं पर भी बात होगी.

लाहौर में हुए धमाके की वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने अपना दौरा रद्द कर दिया है लेकिन पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए वहां मौजूद होगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने दुनिया को परमाणु हथियारों से पूरी तरह से मुक्त करने के सपने के साथ इस मुहिम की शुरूआत की थी.

वो इसमें कामयाब नहीं हो सके लेकिन उनके सलाहकारों का कहना है कि अपने आख़िरी साल में एक बार फिर से उनकी कोशिश इस बात की है कि दुनिया इस ख़तरे के ख़िलाफ़ एकजुट हो सके.

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