किक वाली नहीं, सेल्फ स्टार्ट गाड़ी बनें

।। दक्षा वैदकर।। हर संस्था में चार तरह के लोग होते हैं. पहला प्रकार होता है, ‘मैं कर सकता हूं और मैं करूंगा.’ ये लोग आत्मविश्वास से भरे होते हैं. जो काम हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं. दूसरा प्रकार होता है, ‘मैं करना चाहता हूं, लेकिन मैं जानता नहीं कि कैसे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | February 6, 2014 4:02 AM

।। दक्षा वैदकर।।

हर संस्था में चार तरह के लोग होते हैं. पहला प्रकार होता है, ‘मैं कर सकता हूं और मैं करूंगा.’ ये लोग आत्मविश्वास से भरे होते हैं. जो काम हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं. दूसरा प्रकार होता है, ‘मैं करना चाहता हूं, लेकिन मैं जानता नहीं कि कैसे करूं.’ ऐसे लोग आगे बढ़ना चाहते हैं.

इन्हें सिखाने और साथ रखने की जरूरत है. यही कंपनी का भविष्य भी हैं. तीसरा प्रकार होता है, ‘मैं कर सकता हूं, लेकिन मैं करूंगा नहीं.’ इन लोगों की मानसिकता बदल कर, थोड़ा समझा-बुझा कर सुधारा जा सकता है. क्योंकि ऐसे लोगों के काम न करने की तरह-तरह की वजहें होती हैं. बेहतर है कि आप उस वजह को जानें, उसे हल कर इन्हें काम करने के लिए प्रेरित करें. चौथा प्रकार सबसे खतरनाक है. ये हैं, ‘न तो मैं करना चाहता हूं, और न ही मैं करूंगा और न ही मैं किसी और को करने दूंगा.’ ऐसे लोगों पहचान कर बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए. ये लोग कंपनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. उसे खोखला बना रहे हैं. ये ऐसी बातें हैं, जो लीडर को जाननी चाहिए.

अब वे बातें, जो कर्मचारी को जाननी चाहिए. वैसे तो हम सभी को बार-बार जांच करते रहने चाहिए कि क्या मैं अपना पुराना खराब व्यवहार बदलने की क्षमता रखता हूं? क्या मैं अपने मूड को तुरंत बदल सकता हूं? क्या मैं अपना लक्ष्य जानता हूं? क्या मैं अपने काम के प्रति उत्साहित हूं? क्या मैं एक डायनामिक पर्सनालिटी हूं? क्या मैं सेल्फ मोटिवेटेड हूं?

हम में से ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें बाहर से किसी व्यक्ति द्वारा मोटिवेट होने की जरूरत पड़ती है. वे तब तक कोई काम नहीं कर पाते, जब तक कोई धक्का न दे. बाहर से कोई प्रेशर न हो. कोई उन्हें काम के प्रति उत्साहित करता है, तो वे कर लेते हैं और जब वह व्यक्ति चला जाता है, तो वे दोबारा चुप हो कर बैठ जाते हैं. ऐसे लोग ज्यादा दूर नहीं जा सकते. स्कूटर का ही उदाहरण ले लें. एक समय था जब स्कूटर पर किक मारी जाती थी और उसके बाद सवारी की जाती थी. अब लोग सेल्फ स्टार्ट गाड़ी ही पसंद करते हैं. वे ऐसी गाड़ी नहीं चाहते, जिसे बाहर से किक मारनी पड़े.

बात पते की..

किसी और में प्रेरणा न तलाशें. खुद से प्रेरित हों. कोई काम अगर फायदा पहुंचाता है, तो बिना किसी के कहे, दबाव में आये, उसे करना शुरू कर दें.

कंपनी में ऐसे लोगों से दूर रहें, जो काम नहीं करते और दूसरों को भी करने देना नहीं चाहते. ऐसे लोग आपको भी वे अपनी तरह ही बना देंगे.

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