बिहार सरकार अब कानून व्यव्स्था में नया बदलाव करने की तैयारी में है. सरकार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक तैयार कर चुकी है जिसे लेकर सदन में विपक्ष हमलावर है. शुक्रवार को विपक्ष के सदस्यों ने इस विधेयक की प्रतियों को फाड़कर अपना विरोध जताया. दरअसल नयी तैयारी के तहत सरकार अब बिहार सैन्य पुलिस को अधिक अधिकार से लैश कर देगी. जिसके तहत अब केवल संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति की तलाशी और गिरफ्तारी हो सकेगी.
बिहार सरकार जिस विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक को लाने की तैयारी में है उसे लेकर अब विवाद छिड़ गया है. सत्ता पक्ष जहां बीएमपी की ताकत को मजबूत करने का हवाला दे रही है वहीं विपक्ष का कहना है कि इस नयी व्यवस्था से सूबे की पुलिस निरंकुश हो जायेगी. पुलिस को बिना वारंट किसी को परेशान करने का अधिकार मिल जायेगा. उसे किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जायेगा, जिसके लिए वारंट की जरुरत नहीं होगी.
दरअसल बिहार सरकार जिस विधेयक को लाने की तैयारी में है, उसकी प्रति सदन में विधायकों को दी गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नया विधेयक अब बिहार सैन्य पुलिस(बीएमपी) को अधिक अधिकारों से लैश करेगा. विधेयक में बिना वारंट तलाशी लिये जाने का भी प्रावधान जोड़ा गया है. जिसपर विपक्ष का विरोध भी है. इस अधिकार के बाद अब बीएमपी के सक्षम अधिकारी बिना किसी वारंट के संदेह के आधार पर तलाशी और गिरफ्तारी कर सकेंगे. इसके लिए उन्हें वर्तमान व्यवस्था की तरह मजिस्ट्रेट के आदेश और वारंट का इंतजार नहीं करना होगा.
ऐसा माना जा रहा है कि इस विधेयक से बिहार सैन्य पुलिस(BMP)को स्वतंत्र अस्तित्व में लाने की तैयारी सरकार कर रही है. अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो बिहार सैन्य पुलिस का नाम भी बदल जायेगा और अब यह बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के नाम से जाना जायेगा. विधेयक में यह जिक्र किया गया है कि इस विधेयक की जरुरत क्यों महसूस हुई.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक में जिक्र किया गया है कि पहले यह केवल कानून व्यवस्था की हालत पर नियंत्रण के लिए बिहार पुलिस को मदद देती थी लेकिन अब इसके काम का दायरा बढ़ चुका है. अब हवाई अड्डे, मेट्रो व महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में भी इन्हें लगाया जाता है. इसलिए इन्हें भी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तरह अधिकार दिये जाने की जरुरत है.
Posted By: Thakur Shaktilochan