28.1 C
Ranchi

BREAKING NEWS

Advertisement

आजादी के अमृतकाल में भी सिंदरी गांव को नसीब नहीं शुद्ध पेयजल, लोग नाले में साफ करते हैं बर्तन

सिंदरी बस्ती के नाम पर सिंदरी शहर बसा. लोगों ने खाद कारखाने के लिए अपनी जमीन दे दी, लेकिन उन्हें आज तक पीने का पानी मयस्सर न हुआ. पढ़ें ग्रामीणों का दर्द.

सिंदरी (धनबाद), अजय उपाध्याय: देश आजादी का अमृतकाल मना रहा है. लेकिन, धनबाद जिले में आज भी एक ऐसा गांव है, जहां लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं है. इस बस्ती के नाम पर शहर बस गया. विधानसभा क्षेत्र का नामकरण हो गया, लेकिन यहां के लोगों को कोई सुविधा नहीं मिली. आज भी लोग नाली में बर्तन साफ करने के लिए मजबूर हैं.

सिंदरी शहर के बीच में बसी है सिंदरी बस्ती

ऐसा नहीं है कि यह बस्ती शहर से दूर है. यह शहर के बीचोबीच है. नाम है- सिंदरी बस्ती. ठीक पढ़ा आपने. धनबाद के प्रसिद्ध सिंदरी शहर के बीचोबीच है यह सिंदरी बस्ती. वर्ष 1950 से यह बस्ती मौजूद है. इस गांव में 3600 मतदाता हैं. सिंदरी बस्ती में लगभग 2000 पक्का मकान हैं. इसी बस्ती के नाम पर बने शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (हर्ल) खाद कारखना है.

पंडित नेहरू ने सिंदरी को बताया था सुंदरी

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कभी सिंदरी शहर को सुंदरी कहकर संबोधित किया था. लेकिन, जिस सिंदरी बस्ती के नाम पर सिंदरी या कहें सुंदरी शहर बसा, उस सिंदरी गांव (बस्ती) की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया. न स्थानीय नेता, विधायक ने, न ही केंद्रीय नेताओं ने.

Img20240330070105
आजादी के अमृतकाल में भी सिंदरी गांव को नसीब नहीं शुद्ध पेयजल, लोग नाले में साफ करते हैं बर्तन 3

पाइप तोड़कर पानी भरते हैं सिंदरी बस्ती के लोग

आलम यह है कि धनबाद जिले में स्थित इस गांव के बीचोंबीच झरिया-गोविंदपुर मुख्य मार्ग के निकट से सिंदरी शहर में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई है. इसी पाइपलाइन को तोड़कर उस पानी से बस्ती वाले नहाते हैं. पीने का पानी भरते हैं. गांव में 2 कुआं हैं, लेकिन हर साल गर्मी में सूख जाते हैं.

Also Read : सीएम चंपाई सोरेन बोले, बनाएंगे नया झारखंड, सिंदरी खाद कारखाने से आएगी समृद्धि, पीएम नरेंद्र मोदी से जतायी ये उम्मीद

7 चापाकल लगाए गए, 4 हो गए खराब

नगर निगम और विधायक मद से कुल 7 चापाकल लगवाए गए, लेकिन इस समय मात्र 3 चापाकल से ही लोगों को पानी मिल पाता है. 7 टोले में बसा यह सिंदरी गांव धनबाद नगर निगम के वार्ड संख्या 54 में आता है. मार्च के महीने में बारिश हुई, तो नाले में पानी जमा हो गया. इसी पानी से महिलाएं बर्तन और कपड़े साफ करतीं हैं. बरसात के मौसम में सड़क किनारे बने नाले के पानी में लोग स्नान और बाकी काम करने के लिए मजबूर हैं.

डीसी को एक बार हमारे गांव लाएं, प्रभात खबर से ग्रामीणों की अपील

प्रभात खबर की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो बस्ती के लोगों ने अपील की कि एक बार धनबाद की उपायुक्त महोदया को बस्ती में बुलवा दें. कहा कि अभी तो गर्मी का शुरुआत है. एक बार हमारी बस्ती में डीसी मैडम आएं, हमारे दुःख-दर्द को समझें. यह भी समझने की कोशिश करें कि जून-जुलाई में हमलोग किस तरह जीवन यापन करते हैं.

Img20240330065921
आजादी के अमृतकाल में भी सिंदरी गांव को नसीब नहीं शुद्ध पेयजल, लोग नाले में साफ करते हैं बर्तन 4

चापाकल खराब हुए, तो कभी उसकी नहीं हुई रिपेयरिंग

नगर निगम और विधायक मद से सिंदरी बस्ती में चापाकल तो लगे, लेकिन एक बार खराब होने के बाद कभी उसकी रिपेयरिंग नहीं हुई. बस्ती के पास दामोदर नदी है. इसलिए जमीन के नीचे काफी बालू है. सो डीप बोरिंग होगी, तभी पानी की समस्या का समाधान हो सकता है.

Also Read : हर्ल में बोले पीएम : 2018 में सिंदरी खाद कारखाने को चालू करने का संकल्प लिया था, आज मोदी की गारंटी पूरी हुई, VIDEO

1950 में खाद कारखाने के लिए लोगों ने दी थी अपनी जमीन

बस्ती के लोगों ने कहा कि वर्ष 1950 में हमलोगों ने एफसीआईएल खाद कारखाने के लिए अपनी जमीन दी थी. कंपनी वालों ने कई वायदे किए थे. एफसीआईएल वर्ष 1952 में शुरू हुआ और वर्ष 2002 में बंद भी हो गया. कंपनी को खुलकर बंद हुए 22 साल बीत गए, वर्ष 2024 आ गया, लेकिन इस बस्ती के लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हुआ. कागज पर न जाने कितनी योजनाएं बनीं, लेकिन धरातल पर एक भी योजना नहीं उतरी. यह भी बताया कि तीन साल पहले माडा की ओर से बस्ती के कुछ इलाकों में पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज भी उस नल में पानी नहीं आया.

क्या कहते हैं ग्रामीण?

वर्ष 1953 से मेरा परिवार और हमलोग इस गांव में रह रहे हैं, लेकिन आज तक पीने का पानी नहीं मिला. हमारे गांव का नाम आज इतना चर्चित है, लेकिन यहां के लोगों की सहूलियत के लिए कुछ भी नहीं हुआ. सरकार का ध्यान सिंदरी बस्ती के लोगों पर जाता ही नहीं.

पुरुषोत्तम पांडेय

दुर्भाग्य है कि हम सिंदरी बस्ती के लोगों का कि पूरे सिंदरी शहर को पानी पिलाने वाला सेटलिटैंक हमारे गांव के पास है, लेकिन हमलोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलता है. गंदा पानी पीने से कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं. न जाने कितने लोग गंदा पानी पीने की वजह से मौत के मुंह में चले गए.

श्रवण बाउरी

जबसे हमलोगों ने होश संभाला है, तब से न जाने कितने लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव हो गए. विधानसभा के चुनाव हो गए. नेता चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं. जीतने के बाद फिर कभी इस बस्ती की ओर झांकने तक नहीं आते. हमारे गांव के नाम पर सिंदरी शहर बसा है. पूरे भारत में इस शहर को जाना जाता है. लेकिन, वर्षों से गांव के लोग पेयजल को तरस रहे हैं.

गुरुपद मल्लिक

कुछ लोगों ने अपने खर्च पर पेयजल की व्यवस्था कर रखी है. ज्यादातर लोग गरीब हैं. उनके लिए दो जून की रोटी कमाना मुश्किल है. वे पानी के लिए अलग से पैसे कहां से खर्च कर पाएंगे. सिंदरी शहर हमारे गांव के नाम पर बसा. वहां सीमेंट फैक्ट्री है. खाद का कारखाना है. कई छोटे-बड़े उद्योग हैं, लेकिन हमारी बस्ती में पीने का पानी नहीं है. झारिया-गोविंदपुर सड़क पार करके पानी भरने के लिए जाना पड़ता है. सड़क दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है.

विजय बाउरी

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Advertisement

अन्य खबरें

ऐप पर पढें