राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो ने इस संबंध में विभाग द्वारा तैयार किये गये प्रस्ताव को मंगलवार को स्वीकृति दे दी है. शिक्षा मंत्री ने फिलहाल राज्य के निजी विद्यालयों में तीन माह तक किसी प्रकार के शुल्क लेने पर रोक लगा दी है. पढ़िए सुनील कुमार झा की रिपोर्ट.
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शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने निर्देश दिया है कि कोरोना संकट के दौरान अभिभावकों पर शुल्क के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाये. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को किसी प्रकार की सुविधा से वंचित नहीं किया जाये. इस मामले को लेकर शिक्षा मंत्री ने कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है. कमेटी इस मामले में पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी. कमेटी को एक माह के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है. इसी के आधार पर सरकार अंतिम निर्णय लेगी. शिक्षा मंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन का प्रभाव लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है. ऐसे में लोग फीस देने में सक्षम नहीं हैं. निजी स्कूल मार्च 2020 से मई 2020 तक की फीस अगले आदेश तक नहीं लें.
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कमेटी निजी स्कूलों के शुल्क को लेकर देश के अन्य राज्यों में लिये गये निर्णय का अध्ययन करेगी. इसके अलावा फीस में छूट देने के मामले में कानूनी पहलुओं के बारे में जानकारी लेगी. इसके बाद इस संबंध में रिपोर्ट तैयार की जायेगी. सरकार दिल्ली की तर्ज पर निजी स्कूलों के इस वर्ष सरकार की अनुमति के बिना शिक्षण शुल्क में वृद्धि नहीं करने व वार्षिक शुल्क नहीं लेने का निर्देश देने पर विचार कर रही है.
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शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि लॉकडाउन का असर लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है. निजी स्कूलों को तीन माह तक फीस नहीं लेने के लिए कहा गया है. इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए कमेटी गठित की जायेगी. कमेटी एक माह में रिपोर्ट देगी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भी निजी स्कूलों की फीस के मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया गया है.